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वीडियो: पोस्टमॉर्टम किए शव को अस्पताल में सिल रहा लॉउंड्री वाला

वीडियो में एक आदमी हाथ में सर्जिकल दस्ताने पहने हुए पोस्टमार्टम के बाद रखे हुए शव को सिल रहा है। बताया गया कि ये आदमी इस अस्पताल में लॉउंड्रीमैन यानी की कपड़े धोने वाले की हैसियत से काम करता है।

तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सी. विजयभास्कर ने इस मामले में उच्‍चस्‍तरीय जांच की घाेषणा की है। फोटो- एएनआई

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में तमिलनाडु के सरकारी अस्पताल में गंभीर मेडिकल लापरवाही का नजारा दिखाई पड़ रहा है। ये वीडियो शुक्रवार को ही वायरल होना शुरू हुआ था। इस वीडियो में एक आदमी हाथ में सर्जिकल दस्ताने पहने हुए पोस्टमार्टम के बाद रखे हुए शव को सिल रहा है। बताया गया कि ये आदमी इस अस्पताल में लॉउंड्रीमैन यानी की कपड़े धोने वाले की हैसियत से काम करता है।

वीडियो में हॉस्पिटल का स्टाफ की लापरवाही को साफ तौर पर देखा जा सकता है। स्टाफ मरीजों के लिए बनाए गए हर नियम-कायदे की धज्जियां उड़ाता हुआ साफ दिखता है। भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की इससे बुरी तस्वीर शायद ही कहीं और दिखे, जैसी इस वीडियो में देखी जा सकती है। ये वाकया ​तमिलनाडु के त्रिची जिले के थुराईयूर में बने जिला अस्पताल का है। ये वीडियो राज्य सरकार के अस्पतालों में मौजूद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, अगर कल को इस अस्पताल में आने पर बाल काटने वाला आॅपरेशन करता हुआ देखने को मिल जाए।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यही है कि इस अस्पताल में 12 डॉक्टर और 17 नर्स काम करती हैं। बड़ी संख्या में लैब तकनीशियन भी इस अस्पताल में काम कर रहे हैं। इतने बड़े अमले की तैनाती का सिर्फ एक ही मकसद है। थुराईयूर जिले के आसपास मौजूद 100 गांव के लोगों की देखभाल करना। हॉस्पिटल प्रशासन ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है कि ऐसी हालात इसलिए पैदा हुए क्योंकि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और स्टाफ मौजूद नहीं थे। अब इस मामले पर राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने उच्च स्तरीय जांच बैठा दी है।

गरीब मरीजों के साथ भेदभाव की घटनाएं देश में आम हैं, जबकि अमीर-गरीब दोनों ही सांस लेते हैं और बीमार पड़ते हैं। दोनों का ही इलाज भारत के डॉक्टरों के द्वारा किया जाता है। लेकिन देश में इलाज में लापरवाही का आंकड़ा दिन ब दिन बढ़ता चला जा रहा है। ऐसी घटनाओं से जन स्वास्थ्य संस्थाओं से मरीजों का भरोसा टूटता है बल्कि ये महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है। हमें न जाने कितने दिनों तक अपने देश में मरीजों और आम आदमी के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजार करना पड़ेगा। ताकि उनके शवों का पोस्टमार्टम कोई डॉक्टर करे न कि कोई कपड़े धोने वाला लॉउंड्रीमैन।

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