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इस डॉक्‍टर की मौत पर रोया पूरा शहर, दो रुपए में करते थे इलाज, 40 साल से बचा रहे थे जीवन

'जयाचंद्रन की सेवा भाव को देख कई ट्रस्ट मदद के लिए आगे आए। लेकिन उन्होंने किसी का भी पैसा लेने से इंकार कर दिया। वह उनसे कहते थे कि आप पैसों के बदले हमें दवाएं दान में दीजिए'।

डॉक्टर एस जयाचंद्रन (फोटो सोर्स : @mkstalin)

डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है। इंसान की तरफ कदम बढ़ा रही मौत को भी वह रोक सकता है। लेकिन चेन्नई में एक ऐसे डॉक्टर को मौत ने अपने आगोश में ले लिया, जिसने जिंदगी भर दूसरों के आंसू आने से रोके। डॉक्टर की मौत पर पूरा शहर रो पड़ा। डॉक्टर एस जयाचंद्रन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह ‘लोगों के डॉक्टर’ नाम से फेमस थे। बीते 40 साल से वह जिंदगियां बचा रहे थे। दो रुपए में वह लोगों का इलाज करते थे।

ओल्ड वाशरमैनपेट के उनके घर पर हजरों की संख्या में लोग उन्हें नम आंखे लिए श्रद्धांजलि देने पहुंचे। जयाचंद्रन के बड़े बेटे सरावन जगन ने बताया कि, ‘वह बीते काफी समय से फेफड़ो की समस्या से घिरे हुए थे। ग्रींस रोड़ पर स्थित एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। जहां उन्होंने बुधवार सुबह 5:15 पर आखिरी सांस ली। जगन ने बताया, वह हमेशा दूसरों की सेवा करने के लिए कहा करते थे। वह कहते थे कि नॉर्थ चेन्नई के लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जो महंगा इलाज नहीं करा सकते। इसलिए हमें उनकी मदद करनी चाहिए’।

डॉक्टर एस जयाचंद्रन से इलाज करा चुकीं के राजेश्वरी ने बताया कि, वह उनके फैमिली डॉक्टर थे। मैं उन्हें बीते 40 साल से जानती हूं। इस नेक काम में आज डॉक्टर्स ने बिजनेस बना दिया है लेकिन वह हमेशा इसे लोगों की सेवा के नजरिए से ही देखते थे। अपनी प्रैक्टिस के दौरान जयाचंद्रन केवल 25 पैसे ही लोगों से लेते थे।

डॉक्टर एस जयाचंद्रन के दोस्तों ने बताया कि, उन्होंने मद्रास मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की थी। इसके बाद 1970 में उन्होंने ओल्ड वाशरमैनपेट में अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी। कुछ समय बाद उन्होंने अपनी क्लीनिक कासीमेडू में शिफ्ट कर दी। हालांकि वह अपने घर पर भी लोगों की सेवा में लगे रहते थे। वह शुरुआती दौर में साइकिल से ही तंग गलियों में लोगों के जाकर इलाज करते थे।

लोगों ने बताया कि जयाचंद्रन की सेवा भाव को देख कई ट्रस्ट मदद के लिए आगे आए। लेकिन उन्होंने किसी का भी पैसा लेने से इंकार कर दिया। वह उनसे कहते थे कि आप पैसों के बदले हमें दवाएं दान में दीजिए। इतना ही नहीं, जयाचंद्रन लोगों की स्थिति देखकर जिन सेंटर में जांच कराने के लिए भेजते थे, वहां भी मरीजों को काफी छूट दी जाती थी।

यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास में बॉटनी डिपार्टमेंट के पूर्व निदेशक और रामचंद्रन के दोस्त एन रमन ने बताया कि, 2016 में पद्मश्री पुरस्कार के लिए उन्हें मानव सेवा के आधार पर उनके शुभचिंतकों और दोस्तों द्वारा नामित किया गया था। रमन ने बताया कि, वह इस पुरुस्कार के हकदार थे लेकिन उन्हें मिल नहीं पाया।

रामचंद्रन का जन्म कांचीपुरम जिले के कोडइपट्टिनम गांव में हुआ था। उन्हें 2008 में नाइटहुड अवार्ड से सम्मानित किया गया था। डॉक्टर एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 2012 में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरुस्कार ने नवाजा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की तरफ से उन्हें 2005,2006 और 2009 में डॉक्टर्स डे अवार्ड से सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं, 2013 में तमिलनाडु के तत्कालीन गवर्नर के रोसैया ने रामचंद्रन को बेस्ट सोशल सर्विस डॉक्टर अवार्ड से नवाजा था।

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