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अध्यादेश आने के बाद फिर शुरू हुआ जल्लीकट्टू, 950 सांडों के साथ लोग दिखा रहे अपना दम-खम

अवनीपुरम में आयुजित इस खेल में क1200 खिलाड़ी अपने 950 सांडों को लेकर अपने खेल का प्रदर्शन करेंगे।

2010 से 2014 के बीच जल्लीकट्टू खेलते हुए 17 लोगों की जान गई थी और 1,100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। (फोटो-पीटीआई)

फसलों की कटाई के अवसर पर पोंगल के समय मदुरै में आयोजित होने वाले तमिलनाडु के विवादित खेल जल्लीकट्टू को मंजूरी मिलने के बाद आज फिर से यह खेल शुरू हो गया है। काफी मुश्किलों और कानूनी पचड़े से निकलने के बाद मदुरै के अवनीपुरम के लोगों के बीच खुशी का माहौल है क्योंकि उन्हें अपने पुराने खेल जल्लीकट्टू को खेलने की अनुमति मिली। अवनीपुरम में आयोजित इस खेल में 1200 खिलाड़ी अपने 950 सांडों को लेकर अपने खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं। किसी प्रकार का हादसा न हो इसके लिए मेडिकल उपचार की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवनीपुरम में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

आपको बता दें कि जल्लीकट्टू तमिल संस्‍कृति का पारंपरिक खेल है। इसमें सांडो के साथ मिलकर लोग आपस में लड़ते है। इस खेल के दौरान कई लोगों और सांडो की जान को खतरा होता है लेकिन फिर भी लोग इसे बहुत उत्साह के साथ खेलते है। पिछले 10 साल से पशु कार्यकर्ताओं और पशु कल्याण संगठनों जैसे कि फेडरेशन ऑफ इंडिया एनिमल प्रोटेक्शन एजेंसी और पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स द्वारा जल्लीकट्टू के खिलाफ लड़ाई लड़ने के बाद 7 मई 2014 को इसपर सुप्रीम कोर्ट नें रोक लगा दी थी। जिसके बाद मदुरै के लोगों द्वारा इस खेल को फिर से शुरु करने की मांग की जा रही थी। जानवरों के हित की बात करने वाले सभी संस्थानों ने इस खेल का विरोध करते हुए कहा था कि इस खेल के जरिए बेजुबान जानवरों के साथ होते अत्याचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। जानवरों के साथ होते हिंसक व्यवहार को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस खेल को बैन कर दिया था।

इस खेल में जानवरों को ही चोट नहीं पहुंचती बल्कि कई इन्सानों की भी जान चली जाती है। इस खेल को फिर से शुरु करने के लिए मदुरै के लोग सरकार से मांग कर रहे थे। काफी मशक्‍कत के बाद तमिलनाडू सरकार की तरफ से अध्‍यादेश लाया गया जिसमें इस खेल को फिर से शुरु करने की बात कही गई। तमिलनाडू विधानसभा में बहुत देर हंगामा चलने के बाद इस पास कर दिया गया। यह खेल शुरु तो हो गया लेकिन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे मंजूरी नहीं दी गई है।

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