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जयललिता की मेडिकल रिपोर्ट्स हुईं सार्वजनिक, तमिलनाडु सरकार ने कहा- हरसंभव इलाज कराया

तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जयललिता की सेहत के बारे में वरिष्‍ठ मंत्रियों व राजनेताओं को जानकारी दी गई थी।

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तमिलनाडु सरकार ने पूर्व मुख्‍यमंत्री जे. जयललिता के मेडिकल दस्‍तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है। सरकार ने कहा है कि ‘यह साफ है कि उनके लिए सबसे अच्‍छी मेडिकल सहायता का इंतजाम किया गया था।’ सरकार के बयान में कहा गया है कि ‘4 दिसंबर 2016 को जयललिता को दिल का दौरा पड़ा, उस समय अपोलो अस्‍पताल के विशेषज्ञ कमरे में मौजूद थे। अपोलो और एम्‍स के डॉक्‍टरों की एक टीम ने हालात का जायजा लिया। इसके बाद यह सामने आया कि दिल की धड़कन जा चुकी थी और लाइफ सपोर्ट के बावजूद कोई न्‍यूरोलॉजिकल बेहतरी नहीं दिखी।’ AIIMS ने 19 पन्‍नों की मेडिकल रिपोर्ट तमिलनाडु सरकार को सौंपी थी। तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री को पिछले साल 22 सितंबर की रात को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद उनके इलाज पर पांच करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए। अस्पताल में 75 दिनों तक रहने के बावजूद जयललिता को बचाया नहीं जा सका।

इससे पहले, जयललिता का इलाज करने वाले लंदन स्थित विशेषज्ञ रिचर्ड बेअले, अपोलो अस्पताल प्रबंधन और सरकारी डॉक्टरों ने जहर से मौत होने के कारण के सिरे से खारिज किया था। उन्‍होंने कहा था कि न तो उनके (जया) इलाज और न ही उनके निधन में ‘कोई साजिश’ या रहस्य है। डॉक्‍टरों ने कहा कि अस्‍पताल में जयललिता के इलाज के लिए 5.5 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया था।

जयललिता की मौत के रहस्‍य से पर्दा उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार लगाई गई थी। राज्यसभा सदस्य और निलंबित अन्नाद्रमुक नेता शशिकला पुष्पा के अलावा एक गैर-सरकारी संगठन ने शीर्ष अदालत में एक रिट याचिका लगाई थी। हालांकि न्यायमूर्ति पी सी घोष और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ ने उसे खारिज कर दिया था।

पुष्पा ने इस मुद्दे को लेकर 18 दिसंबर 2016 को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत ‘संदिग्ध’ थी क्योंकि उनकी तबीयत की वास्तविक स्थिति का खुलासा नहीं किया गया था, किसी को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गयी थी, अंतिम संस्कार से पहले उनके पार्थिव शरीर की तस्वीरों में शव पर लेपन किया हुआ दिखता है और उनके अस्पताल में भर्ती कराये जाने से लेकर मृत्यु तक की सारी चीजों को ‘गोपनीय रखा गया।’

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