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हिंदू रीति-रिवाजों के साथ फिर किया गया जयललिता का अंतिम संस्‍कार, सौतेले भाई ने निभाईं रस्‍में

मंगलवार को जयललिता की तरह दिखने वाली गु‍ड़िया का हिंदू रीति-रिवाजों से दाह संस्‍कार किया गया।

Author चेन्‍नई | December 14, 2016 2:12 PM
चेन्नई के एवरविन स्कूल के छात्र तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को स्कूल परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए। (PTI Photo by R Senthil Kumar/8 Dec, 2016)

तमिलनाडु की दिवंगत मुख्‍यमंत्री जे जयललिता के परिवार ने हिंदू रीति-रिवाजों से उनका दोबारा अंतिम संस्‍कार किया है। बताया जाता है कि जया का परिवार उन्‍हें दफनाने के AIADMK के फैसले से नाराज था। टीओआई रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को जयललिता के सौतेले भाई वर्दाराजू ने श्रीरंगपटना की पश्चिम वाहिनी में अंतिम संस्‍कार की रस्‍में निभाईं। वर्दाराजू ने यह कहते हुए पार्टी द्वारा जयललिता को दफनाने के फैसले पर सवाल उठाए कि अन्‍य द्रविड़ नेताओं से इतर ईश्‍वर में विश्‍वास रखती थीं। जयललिता के कुछ अन्‍य रिश्‍तेदारों ने भी अंतिम संस्‍कार में हिस्‍सा लिया, जिसमें जयललिता की तरह दिखने वाली गु‍ड़िया का हिंदू रीति-रिवाजों से दाह संस्‍कार किया गया। इससे पहले, तमिलनाडु सरकार के एक वरिष्‍ठ सरकारी सचिव ने इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया था कि जयललिता को मरीना बीच पर दफनाया क्‍यों गया। उन्‍होंने कहा था, ”वह हमारे लिए आयंगर नहीं थीं। वह किसी जाति और धार्मिक पहचान से परे थीं। यहां तक कि पेरियार, अन्‍ना दुरई और एमजीआर जैसे ज्‍यादातर द्रविड़ नेता दफनाए गए थे और हमारे पास उनके शरीर का दाह-संस्‍कार करने की कोई मिसाल नहीं है। तो, हम उन्‍हें चंदन और गुलाब जल के साथ दफनाते हैं।”

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पूर्व नेताओं को दफनाए जाने से समर्थकों को एक स्‍मारक के तौर पर उन्‍हें याद रखने में सहायता होती है। द्रविड़ आंदोलन के नेता नास्तिक होते हैं, जो कि सैद्धांतिक रूप से ईश्‍वर और समान प्रतीकों को नहीं मानते। लेकिन यह दिलचस्‍प है कि ईश्‍वर के अस्तित्‍व से पैदा हुई कमी को मूर्तियों और स्‍मारकों से भर दिया जाता है। फैंस और समर्थकों को विश्‍वास है कि वे अभी भी मरीना बीच पर एमजीआर की घड़ी के टिक-टिक करने की आवाज सुन सकते हैं।

जयललिता का  चेन्‍नई के अपोलो हॉस्पिटल में सोमवार (5 दिसंबर) की रात 11.30 बजे निधन हो गया था। अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को राजाजी हॉल में रखा गया। जयललिता को अंतिम विदाई देने के लिए लाखों लोग पहुंचे थे। तमिलनाडु कैबिनेट ने 10 दिसंबर को फैसला किया कि वह जयललिता के नाम की सिफारिश ‘भारत रत्न’ सम्मान के लिए करेगी।

जयललिता के निधन के बाद मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक में कैबिनेट ने संसद परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की सिफारिश केंद्र सरकार से करने का फैसला भी किया।

जयललिता को अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर उतरी भारी भीड़, देखें वीडियो: 

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