ताज़ा खबर
 

जल्लीकट्टू का विरोध करने वाले PETA पर है 34 हजार जानवरों की “हत्या” का आरोप

वर्जीनिया डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एंड कंज्यूमर की साल 2010 की जांच के अनुसार छह साल में पेटा की निगरानी में रह रहे 2317 कुत्ते-बिल्लियों में से 99.3 प्रतिशत को इच्छामृत्यु (हत्या) दी गयी थी।

Jallikattu, chennaiगुरुवार (19 जनवरी) को चेन्नई के मरीना बीच पर जल्लीकट्टू पर रोक के विरोध में उतरे लोग। (REUTERS/Stringer)

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सांडों से लड़ाई के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू का विरोध करने वाले पशु अधिकार संगठन पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) की निगरानी में रहने वाले दो हजार पालतू जानवरों की साल 2011 में मौत हो गयी थी।  एक गैर-सरकारी संगठन की साल 2012 की रिपोर्ट के अनुसार पेटा के अमेरिका के वर्जीनिया स्थित मुख्यालय में साल 1998 के बाद से 34 हजार जानवरों की “हत्या” कर चुका है।

पेटा एक गैर-सरकारी संगठन है जिसका दावा है कि वो पशुओं का भोजन, वस्त्र, प्रयोग या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पेटा के अनुसार संस्था पशुओं के “कल्याण और पुनर्वास” का काम करती है। दक्षिण भारत के प्रमुख पर्व जल्लीकट्टू पर पेटा एवं अन्य संगठनों की याचिका पर सुनवाई करते हुए साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इस जल्लीकट्टू पर रोक लगा दी थी। दक्षिण भारत में पोंगल के मौके पर सांडो से लड़ाई का खेल खेला जाता है जिसे जल्लीकट्टू कहते हैं। इस पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ हजारों लोगों ने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी जल्लीटकट्टू से बैन हटाकर पेटा पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे थे।

वर्जीनिया डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एंड कंज्यूमर की साल 2010 की जांच के अनुसार संस्था के पास “बचाए गए” जानवरों को रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। 2010 में जांच एजेंसी ने पाया था कि पिछले छह साल में (2010 तक) पेटा की निगरानी में रह रहे 2317 कुत्ते-बिल्लियों में से 99.3 प्रतिशत को इच्छामृत्यु (हत्या) दी गयी थी।

साल 2011 में पेटा ने न्यूजवीक पत्रिका को दिए विवादित इंटरव्यू में कहा था कि वो जानवरों को
उत्पीड़न करने, भूखे रखने या शोध के लिए बेचने” के बजाय उन्हें “दर्दरहित” मौत देना बेहतर समझती है। साल 2012 में पेटा के मीडिया अधिकारी जेन डॉलिंगर ने द डेली कालर से कहा था कि संस्था की निगरानी में मौजूद कई जानवर चोट, बीमारी, बुढ़ापा, उत्तेजना या “अच्छे आवास के अभाव” में मर जाते हैं।

द डेली कालर की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार पेटा के दो कर्मचारियों को अमेरिकी पुलिस ने 2005 में जानवरों के शप को नार्थ कैरोलीना डंपस्टर में फेंकते हुए पकड़ा था। इन जानवरों को पेटा कर्मचारियों ने संस्था की वैन में “हत्या” की थी।  पेटा के खिलाफ अभियान चलाने वाली संस्था सेंटर फॉर कंज्यूमर फ्रीडम (सीसीएफ) का आरोप है कि पेटा कुत्ते-बिल्लियों के लिए जरूरी आवास के निर्माण के बजाय मीडिया और विज्ञापन पर ज्यादा खर्च करती है। सीसीएफ के अनुसार पेटा का सालान बज़ट 3.74 करोड़ डॉलर (करोड़ 254 करोड़ रुपये) है।

वीडियो में देखें जल्लीकट्टू कैसे खेला जाता है:

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चेन्नई: जलीकट्टू के समर्थन में मरीना बीच पर उतारी हजारों की भीड़, राज्य भर में विरोध प्रदर्शन
2 जल्लीकट्टू पर बैन: तमिलनाडु के मंत्रियों ने प्रदर्शनकारियों से कहा, राष्ट्रपति से अध्यादेश की मांग करेंगे
3 जल्लीकट्टू प्रदर्शन: मद्रास हाई कोर्ट का दख़ल से इनकार, कहा- मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है
ये पढ़ा क्या?
X