इकलौते पब्लिक टॉयलेट के सामने बनवा दिया मंदिर, फिर दलितों का रोका रास्ता - Dalits in Senguttaipalayam have not been allowed to use the only public toilet - Jansatta
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इकलौते पब्लिक टॉयलेट के सामने बनवा दिया मंदिर, फिर दलितों का रोका रास्ता

आरोप है कि दलितों को जबरन खुले में बाथरूम जाने के लिए मजबूर किया गया। खुले में बाथरूम जाने के दौरान भी दलितों का रास्ता रोका गया।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

तमिलनाडु में पोलाची के वरदानुर पंचायत के सेनगुट्टिप्पालयम गावं में एकलौते पब्लिक टॉयलेट के सामने मंदिर बनने की वजह से यहां के दलितों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक टॉयलेट के सामने मंदिर निर्माण की वजह से दलितों को इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। आरोप है कि दलितों को जबरन खुले में बाथरूम जाने के लिए मजबूर किया गया। खुले में बाथरूम जाने के दौरान भी दलितों का रास्ता रोका गया। क्योंकि मंदिर का एक हिस्सा इस स्थान से सटा हुआ है। द मिंट न्यूज के मुताबिक मंदिर का एक हिस्सा परंबिकुलम-अलीयार पोजोक्ट नहर के साथ मिलता है। जबकि इसी हिस्से का इस्तेमाल दलित खुले में बाथरूम जाने के लिए करते हैं। इसलिए हिंदुओं ने अब इस रास्ते को भी रोक दिया है। नाम ना छापने की शर्त पर गांव की ही एक दलित महिला ने बताया कि मंदिर निर्माण करीब एक महीना पहले किया गया। हम खुले में बाथरूम जाने के लिए इसी रोड का इस्तेमाल करते हैं लेकिन अब कांटे का बाड़ा बनाकर हमारा रास्ता रोक दिया गया है। इससे पहले हम मंदिर के सामने बने पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते थे, लेकिन मंदिर निर्माण के बाद से हमें इसका इस्तेमाल नहीं करने दिया गया।

एक शख्स ने बताया कि पोलाची के पीड़ितों की तरफ से वह सब कलेक्टर को पत्र लिख चुका है। पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत स्कीम को आजतक गांव में लागू नहीं किया गया है। बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर को बाथरूम बनवाने के लिए 12,000 रुपए की राशि देने का नियम है। शख्स ने आगे बताया कि गांव में करीब 150 दलित घर हैं। जिस स्थान पर मंदिर बनाया गया है अब उस रोड को बंद कर दिया गया है। वह इस संबंध में अनगिनत याचिकाएं संबंधित विभाग में दे चुका है। मगर उनका जवाब संतोषजनक नहीं है। वो कहते हैं कि उनके हाथ में पॉवर नहीं है। वहीं एक महिला ने बताया कि उन्हें टॉयलेट की जरुरत है, लंबे समय से गांव के दलित इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोई भी याचिकाओं का जवाब नहीं देता है। अब उस रोड को भी बंद कर दिया जहां से वो खुले में शौच के लिए जाते थे।

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