तमिलनाडु से यूपी लौटे प्रवासी परिवार को ना मिला मुफ्त राशन, न कोई काम; मां ने बेच दिए गहने ताकि बच्चों का भर सकें पेट

Coronavirus: भूख और बीमारी से तड़प रहे बच्चों की खातिर मां अपने गहने तक बेच दिए। गहने बेचकर जो पैसे मिले उनसे परिवार कुछ दिन तक गुजारा करता रहा, मगर बाद में वो पैसे भी खत्म हो गए।

kannauj, migrant workersतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (PTI)

Coronavirus: कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के चलते देश में लाखों लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। इसमें प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजगार ना होने के चलते अपने गृह राज्यों में वापस लौटना पड़ा। ये मजदूर वापस अपने गावों की तरफ लौटें तो इन्हें आर्थिक तंगी से दो-चार होना पड़ा। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले का है, जहां तमिलनाडु से लौटे एक प्रवासी परिवार को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इस परिवार को गांव में ना मुफ्त में राशन मिला और ना ही काम की व्यवस्था हो पाई। ऐसे में में भूख और बीमारी से तड़प रहे बच्चों की खातिर मां अपने गहने तक बेच दिए। गहने बेचकर जो पैसे मिले उनसे परिवार कुछ दिन तक गुजारा करता रहा, मगर बाद में वो पैसे भी खत्म हो गए। हालांकि जिले के डीएम के संज्ञान में मामला आने के बाद परिवार का राशन कार्ड और रोजगार कार्ड बनवा दिया गया। इसके अलावा परिवार को खाने के लिए राशन मुहैया कराया गया।

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लॉकडाउन के चलते रोजगार ना होने के चलते ये परिवार तमिलनाडु से लौटा था। गांव पहुंचे तो बच्चों को भूख और बीमारी से तड़पता देख मां ने 1500 रुपए में अपने गहने बेच दिए। परिवार पिछले महीने अपने गांव लौटा था। दरअसल कन्नौज जिले के फतेहपुर जसोदा निवासी राम विवाह के कुछ दिनों बाद पत्नी गुड्डी देवी को तमिलनाडु के किड्डलोर लेकर चले गए थे।

राम करीब 30 साल से वहां कुल्फी बेचने का काम कर रहे थे। लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया और मकान मालिक के दबाव के चलते घर खाली होने के मजबूर होना पड़ा। जिसके बाद राम 21 मई को परिवार के साथ श्रमिक स्पेशल में कन्नौज लौट आए।

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