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हेड कॉन्स्टेबल बोला- ‘मैं बनना चाहता हूं तिहाड़ का जल्लाद’, नहीं लूंगा एक भी पैसे

दिल्ली में कारावास डीजीपी को लिखे पत्र में हेड कांस्टेबल सुभाष श्रीनिवास ने कहा, ‘मैं तिहाड़ जेल में जल्लाद के तौर पर काम करना पसंद करूंगा।’

Author रामनाथपुरम | Updated: December 8, 2019 5:15 PM
दिल्ली की तिहाड़ जेल (फोटो सोर्स -इंडियन एक्सप्रेस)

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले से एक अजीबों गरीब मामला सामने आया है। रामनाथपुरम जिले में एक हेड कांस्टेबल ने तिहाड़ जेल में मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी पर लटकाने वाला जल्लाद बनने की पेशकश की है। उसका यह पेशकश तब सामने आया जब वह उसे इस बात का पता चला कि तिहाड़ जेल में कोई जल्लाद नहीं है। बता दें कि इससे पहले रवि कुमार नामक एक और वय्क्ति ने भी इस तरह की पेशकश कर चुका है। उसने भी तिहाड़ जेल का जल्लाद बनने की इच्छा जाहिर की है।

सुभाष ने क्या पेशकश कीः दिल्ली में कारावास डीजीपी को लिखे पत्र में हेड कांस्टेबल सुभाष श्रीनिवास ने कहा, ‘मैं तिहाड़ जेल में जल्लाद के तौर पर काम करना पसंद करूंगा।’ उन्होंने कहा कि उन्हें इस काम के लिए किसी तरह का भुगतान नहीं चाहिए। वह यह योगदान केवल सेवा के लिए करना चाहता है। देशहित में काम करने के लिए उसने इस तरह की पेशकश की है।

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तिहाड़ जेल में जल्लाद बनने की जताई इच्छाः श्रीनिवास ने कहा कि निर्भया मामले में बयान देते हुए कहा कि मौत की सजा पा चुके चार दोषियों को फांसी पर लटकाया जाना है। श्रीनिवास ने यह भी बताया कि जब उसे यह पता चला कि तिहाड़ जेल में जल्लाद नहीं है तो उन्होंने यह काम करने की इच्छा जताई और फिर पेशकश की है।

रवि कुमार भी कर चुके है ऐसी ही पेशकशः बता दें कि इस मामले में ऐसा ही एक पेशकश शिमला के निवासी रवि कुमार ने किया है। उन्होंने अस्थाई रुप से जल्लाद बनाने की गुहार की है। रवि पेशे से एक सब्जी विक्रेता और एक सामाजिक कार्यकर्ता है। उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर गुजारिश किया कि उसे तिहाड़ जेल का जल्लाद बना दिया जाय।

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