पनीर भारतीय रसोई का एक अहम हिस्सा है। शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का बड़ा स्रोत माना जाता है और घरों से लेकर रेस्तरां तक इसकी खूब खपत होती है। लेकिन अगर आपके सामने परोसा गया पनीर असली न होकर सिंथेटिक या एनालॉग हो तो? महाराष्ट्र सरकार ने इसी चिंता को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
साथ ही होटल, रेस्तरां, कैटरर्स और क्लाउड किचन को भी ऐसे पनीर का इस्तेमाल तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला राज्य में लंबे समय से चल रही जांच और खाद्य सुरक्षा परीक्षणों के बाद लिया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में पनीर के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह आदेश 30 जुलाई को राज्य राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया गया और तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत की गई है।
क्यों लगाया गया सिंथेटिक पनीर पर बैन?
महाराष्ट्र FDA ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 308 पनीर और डेयरी-एनालॉग उत्पादों के नमूनों की जांच कराई। जांच में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। 109 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। 79 नमूने सब-स्टैंडर्ड पाए गए। 30 नमूनों को सीधे तौर पर असुरक्षित घोषित किया गया। जांच में पाया गया कि कई नमूनों में दूध की वसा की जगह वनस्पति तेल और वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल किया गया था, जो असली पनीर के मानकों का उल्लंघन है।
क्या होता है एनालॉग या सिंथेटिक पनीर?
एनालॉग पनीर देखने और छूने में बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन यह पूरी तरह दूध से नहीं बनाया जाता। नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बैंगलोर के रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. सुरेंद्र नाथ बट्टुला के अनुसार, इसे तैयार करने में आमतौर पर पाम ऑयल और वेजिटेबल फैट, स्टार्च, स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP), सोया या मटर जैसे प्लांट प्रोटीन, आर्टिफिशियल फ्लेवर, स्टेबलाइजर और इमल्सीफायर इस्तेमाल होते हैं।
इन सभी चीजों को मिलाकर आम एसिडुलेंट का इस्तेमाल करके इस मिश्रण को जमाया जाता है। इन सभी प्रोसेस के खत्म होने के बाद ऐसा उत्पाद तैयार होता है, जो असली पनीर जैसा दिखाई देता है, लेकिन उसका पोषण मूल्य और गुणवत्ता अलग होती है।
क्यों होता है इतना सस्ता?
जहां अच्छी गुणवत्ता वाला असली पनीर बाजार में लगभग 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, वहीं एनालॉग पनीर करीब 150 रुपये प्रति किलो में तैयार हो जाता है। कम लागत की वजह से कई जगह इसे असली पनीर बताकर ग्राहकों को परोसा जाता है।
होटल और रेस्तरां पर भी सख्ती
FDA ने कहा है कि कई होटल, रेस्तरां, कैटरर्स और क्लाउड किचन बिना किसी जानकारी के ग्राहकों को नॉन-डेयरी पनीर परोस रहे थे। इससे ग्राहक यह समझते थे कि उन्हें असली दूध से बना पनीर मिल रहा है। प्रशासन ने इसे एक्ट की धारा 24 के तहत अनुचित व्यापारिक व्यवहार (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) और धारा 26 के तहत फूड बिजनेस ऑपरेटरों की जिम्मेदारियों का उल्लंघन माना है। अब ऐसे प्रतिष्ठानों को एनालॉग पनीर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना होगा।
यह पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र के फूड सेफ्टी रेगुलेटर ने यह मुद्दा उठाया है। इस साल की शुरुआत में, तत्कालीन फूड सेफ्टी कमिश्नर श्रीधर दुबे-पाटिल ने महाराष्ट्र के सभी रेस्टोरेंट को निर्देश दिया था कि वे बिल, मेन्यू और डिस्प्ले बोर्ड पर यह बताएं कि किन डिश में नॉन-डेयरी पनीर का इस्तेमाल किया गया है।
ढीले पनीर की बिक्री पर भी चिंता
आदेश में यह भी कहा गया है कि कई जगह खुला पनीर बिना पैकेजिंग, बिल, लेबल या बैच नंबर के बेचा जाता है। इससे किसी शिकायत या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की स्थिति में उत्पाद के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। FDA ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम बताया है।
असली पनीर के लिए क्या हैं नए नियम?
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार पनीर को तीन कैटेगरी में बांटा गया है-
रेगुलर/फुल-फैट पनीर – न्यूनतम 50% मिल्क फैट, इसे खुला या पैक्ड दोनों रूप में बेचा जा सकता है।
मीडियम-फैट पनीर – 20% से 50% मिल्क फैट, केवल सीलबंद पैकेट में बेचा जाएगा।
लो-फैट पनीर – 20% तक मिल्क फैट, इसे भी केवल सीलबंद पैकेजिंग में ही बेचा जा सकेगा।
सभी पैक्ड पनीर पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग और डिस्प्ले) नियम, 2020 के अनुसार आवश्यक जानकारी देना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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मुंबई के प्रसिद्ध मिठाई विक्रेता ‘तिवारी ब्रदर्स मिठाईवाला’ का FSSAI लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद की गई, जिसमें एक ग्राहक ने दावा किया कि उसने दुकान से खरीदी गई काजू कतली में जंग लगा स्टेपलर पिन पाया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
