गिलगिट बालिस्‍तान को जम्‍मू कश्‍मीर का हिस्‍सा बताने वाले अलगाववादी नेता ने पाक पीएम को लिखी चिट्ठी - Jansatta
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गिलगिट बालिस्‍तान को जम्‍मू कश्‍मीर का हिस्‍सा बताने वाले अलगाववादी नेता ने पाक पीएम को लिखी चिट्ठी

अलगाववादी नेता और हुर्रियत कॉन्‍फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने नवाज शरीफ को लिखी चिट्ठी में कहा है, 'गिलगिट-बालिस्‍तान का पाकिस्‍तान में विलय करने से जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य के विवादित दर्जे पर प्रभाव पड़ेगा।'

Author श्रीनगर | January 28, 2016 3:00 AM
हुर्रियत कॉन्‍फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी।

गिलगिट-बालिस्‍तान को देश का पांचवां प्रांत बनाने से जुड़े पाकिस्‍तान सरकार के फैसले पर अलगाववादी नेता और हुर्रियत कॉन्‍फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने पाकिस्‍तान के पीएम नवाज शरीफ को लेटर लिखा है। इसमें उन्‍होंने लिखा है कि ‘गिलगिट-बालिस्‍तान का पाकिस्‍तान में विलय करने से जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य के विवादित दर्जे पर प्रभाव पड़ेगा।’

बता दें कि गिलानी इससे पहले भी पाकिस्‍तान पर निशाना साध चुके हैं। उन्‍होंने गिलगिट-बालिस्‍तान को जम्‍मू-कश्‍मीर का अभिन्‍न अंग बताते हुए पाकिस्‍तान के फैसले को कश्‍मीर पर ‘संयुक्‍त राष्‍ट्र के समाधान का उल्‍लंघन’ करार दिया था। उन्‍होंने इसे पाकिस्‍तान की ओर से कश्‍मीर के साथ ‘धोखा’ भी बताया था। गिलानी ने कहा था, ”संघर्ष विराम रेखा के दोनों ओर फैला पूरा जम्‍मू कश्‍मीर एक विवादित इलाका है। इसके किसी हिस्‍से पर यहां के नागरिकों की रजामंदी के बिना कोई फैसला लेने की संवैधानिक या नैतिक तौर पर सफाई नहीं दी जा सकती। यह कश्‍मीर पर यून रिजॉल्‍यूशन का उल्‍लंघन भी है।”

गिलानी ने नवाज शरीफ को लिखी चिट्ठी में कहा है, ”यूएन के प्रस्‍ताव के मुताबिक, ग‍िलग‍िट-बालिस्‍तान समेत पूरा जम्‍मू कश्‍मीर विवादित इलाका है। राज्‍य के अंतरराष्‍ट्रीय संवैधानिक दर्जे को खत्‍म करने से यह मुद्दा भी खत्‍म हो जाएगा और इससे राज्‍य के आम लोगों के दिमाग में शक पैदा होगा। ” गिलानी ने यह चिट्ठी ऐसे वक्‍त में लिखी है जब कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि पाकिस्‍तानी पीएम गिलगिट-बालिस्‍तान के इलाके को देश के पांचवें प्रांत का दर्जा दे सकते हैं। गिलानी ने पीएम को उनके यूएन में दिए गए भाषण की याद दिलाई, जिसमें उन्‍होंने कश्‍मीर के लोगों के अध‍िकारों और मर्जी की वकालत की थी। इसके अलावा, पाक पीएम ने राज्‍य में जनमत संग्रह और सेना को हटाने की मांग भी की थी।

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