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उत्तराखंडः संन्यासियों के जरिए समतामूलक समाज बनाने की पहल

योग गुरु स्वामी रामदेव समतामूलक संन्यास दीक्षा की एक नई परंपरा को गढ़ रहे हैं।

योग गुरु स्वामी रामदेव समतामूलक संन्यास दीक्षा की एक नई परंपरा को गढ़ रहे हैं। यह परंपरा जाति, लिंग और क्षेत्रवाद से दूर होगी। इसके लिए वे साधु-संन्यासियों की एक बड़ी जमात तैयार कर रहे हैं। फिलहाल उनके आश्रम में ब्रह्मचारियों का प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। इस शिविर में चारों वेदों के ज्ञाता संस्कृत के विद्वान 85 ब्रह्मचारियों और ब्रह्मचारिणियों को संन्यास दीक्षा देने के लिए चुना गया है। ये संन्यासी स्वामी रामदेव के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किए जा रहे हैं। स्वामी रामदेव का कहना है कि हमारे उत्तरदायित्वों को ये संन्यासी निभाएंगे।

यह संन्यास दीक्षा समारोह समतावादी होगा और इसकी नींव 25 मार्च को राम नवमी के दिन पड़ेगी। इस राम नवमी को रामदेव के संन्यासी बनने के 23 साल पूरे हो रहे हैं। वे संन्यास दीक्षा के माध्यम से समाज में फैली जाति विषमता को दूर करना चाहते है। लिहाजा जाति भेद नहीं रखा गया है। चारों वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और दलित विद्वान ब्रह्मचारियों और ब्रह्मचारिणियों को एक साथ संन्यास दीक्षा दी जाएगी। दलित समाज में वाल्मिकी समाज के युवा ब्रह्मचारी भी संन्यास दीक्षा लेने में शामिल हैं। अब तक सनातन धर्म की दशनामी संन्यासी परंपरा में ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्य वर्ण के लोगों को संन्यास की दीक्षा दी जाती रही है। दलित वर्ग को इससे वंचित रखा जाता रहा है।

वामी रामदेव ने 35 ब्रह्मचारिणी और 50 ब्रह्मचारी संन्यास दीक्षा के लिए चुने हैं। इनमें कई इंजीनियरिंग और एमबीए पास भी हैं, जो देश के विभिन्न राज्यों से ताल्लुक रखते हैं। इन्हें परीक्षा से गुजरना पड़ा। इनसे चारों वेदों की ऋचाओं पर सवाल-जवाब किए गए। पहले चरण में चुने गए ब्रह्मचारी और ब्रह्मचारिणियों को 25 मार्च को राम नवमी के दिन स्वामी रामदेव संन्यास की दीक्षा देंगे।

वैभवशाली भारत बनाएंगे

वर्ष 2050 तक हमें एक आध्यात्मिक और आर्थिक शक्ति संपन्न परम वैभवशाली भारत बनाने के लिए बड़ी तैयारी करनी है। इस खातिर हम जहां एक तरफ योग और उद्योग का पुरुषार्थ कर रहे हैं, वही पर लगभग 85 आचार्य विद्वानों-विदुषियों को हम संन्यास की दीक्षा दे रहे हैं। इस कार्य के लिए बहुत बड़ी यज्ञशाला बन रही है। चार वेदों का महायज्ञ उसमें होगा और जो हमारी वैदिक और ऋषि परंपरा है उसके अनुरूप हम उन्हें दीक्षा देंगे। खास बात यह होगी कि जो ब्रह्मचारी और ब्रह्मचारिणी संन्यास में दीक्षित हो रहे हैं वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और दलित वाल्मिकि परिवारों से हैं, जब वे सब एक साथ संन्यास लेंगे तो भारत के संन्यास की परंपरा में एक और नया अध्याय जुड़ेगा।- रामदेव

क्रांतिकारी कदम उठाया

पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि स्वामी रामदेव जी ने योग के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम किया है, अब वे संन्यास परंपरा में बडा क्रांतिकारी कार्य करने जा रहे हैं, जो समाज को जोड़ेगा।

नया जीवन शुरु करूंगा

ब्रह्मचारी से संन्यासी बन रहे संदीप कुमार कहते हैं कि संन्यासी बनकर अपना नया जीवन शुरू करेंगे। और हमें खुशी है कि स्वामी रामदेव जी के हाथों हमें संन्यास दीक्षा मिल रही है।

सपना सच हो रहा है

ब्रह्मचारिणी मनीषा कहती हैं कि स्वामी रामदेव जी ने हमारे जीवन को एक कुम्हार की तरह संस्कारों की चाक में ढाला है। जब हम कुछ साल पहले पतंजलि योगपीठ में शिक्षा ग्र्रहण करने आए थे, तब ही हमारे मन में संन्यासी बनने का विचार आया था और हमारा सपना इस साल रामनवमी को पूरा होने जा रहा है।

2020 में 25 साल पूरे

साल 2020 में पतंजलि योगपीठ के 25 वर्ष पूरे होने पर एक हजार ब्रह्मचारियों और ब्रह्मचारिणियों को दूसरे चरण में दीक्षा दी जाएगी। लगता है कि आठ-दस सालों में पतंजलि योगपीठ के संन्यासियों की तादाद 50 हजार से ऊपर पहुंच सकती है।

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