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सपा में शामिल हुए स्वामी ओमवेश ने कहा कि बाग के सच्चे माली हैं अखिलेश यादव

स्वामी ओमवेश शुक्रवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत में स्वामी ने कहा कि बाग के सच्चे माली अखिलेश हैं और इस बाग में सभी तरह के फूलों की जरूरत है

Author लखनऊ | December 22, 2017 11:39 PM
समजावादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव। (एक्सप्रेस फोटो)

स्वामी ओमवेश शुक्रवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत में स्वामी ने कहा कि बाग के सच्चे माली अखिलेश हैं और इस बाग में सभी तरह के फूलों की जरूरत है। वार्ता के दौरान स्वामी ओमवेश ने कहा, “नेता जी (मुलायम सिंह यादव) मुझे बहुत प्यार करते हैं। जब मायावती ने मुझे आगरा जेल में डाल दिया था तो नेता जी ही सांत्वना देते थे।” उन्होंने कहा कि सपा से उनका परिवारिक संबंध है।  स्वामी ने कहा कि इतनी मेहनत और कुर्बानियां देने के बाद मिली आजादी को कुछ लोग और कुछ दल मटियामेट करना चाहते हैं। महात्मा गांधी के देश में नफरत की राजनीति कर उनकी आत्मा को ठेस पहुंचा रहे हैं। ऐसे लोगों के बड़बोलेपन को जनता समझ गई है, इन्हें दोबारा सत्ता नहीं मिलने वाली है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय में पूर्व मंत्री आर.के. चौधरी के साथ स्वामी ओमवेश को भी पार्टी में शामिल कराया। चौधरी प्रदेश के काफी मंझे हुए नेता हैं और बसपा में शामिल होने से पहले बीएस-4 के अध्यक्ष थे। पूर्व सांसद राम शंकर भार्गव ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की। इनके साथ इनके समर्थक भी सपा में शामिल हुए हैं। इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं की मदद से सपा को काफी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा, “हम सदन व जनता के बीच उप्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (यूपीकोका) का विरोध करेंगे। अखिलेश ने कहा कि योगी सरकार में अब सेल्फी लेने पर भी यूपीकोका लगा दिया जाएगा। यूपीकोका विरोधियों को डराने के लिए लाया जा रहा है। इससे कानून व्यवस्था नहीं सुधरेगी, क्योंकि भाजपा के गमछाधारी लोग तो खुद थाना चलाना चाहते हैं।
अखिलेश ने मुकदमा वापसी को लेकर भी तंज किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी पर भी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे में मुकदमा वापसी की फाइलों पर हस्ताक्षर कौन करेगा।

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