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नहीं रहीं कुंवर बाई, इस बूढ़ी मां ने बकरियां बेचकर बनवाए थे टॉयलेट, पीएम नरेंद्र मोदी ने छुए थे पैर

106 साल की इस बूढ़ी मां ने घर पर दो टॉयलेट के निर्माण के लिए अपनी आठ-10 बकरियां 22 हजार रुपयों में बेच दी थीं। कुर्रुभट गांव में आयोजित 'रर्बन मिशन' कार्यक्रम के दौरान उन्हें कोटभर्री गांव की ओर से सम्मानित किया गया था।

स्वच्छ भारत अभियान की मैस्कॉट कुंवर बाई का शुक्रवार को 106 साल की उम्र में निधन हो गया। (फोटोः एएनआई)

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला में रहने वाली कुंवर बाई का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 106 साल की थीं। सोमवार (19 फरवरी) से उनका स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो गया था, जिसके कारण उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान ही उनके दिमाग के साथ कुछ अन्य अंगों ने ठीक से काम करना बंद कर दिया, जिसके बाद उन्हें एक अन्य अस्पताल ले जाया गया। यहीं पर कुंवर बाई ने अपने प्राण त्यागे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वच्छ भारत अभियान के लिए साल 2016 में उन्हें मैस्कॉट के रूप में चुना था, जिसके पीछे का कारण इस बूढ़ी महिला का टॉयलेट बनवाने के लिए अपनी बकरियां बेच देना था। पीएम इसके लिए कुंवर बाई को उनके इन प्रयासों के लिए सम्मानित भी कर चुके थे और तब मोदी ने उनके पैर भी छुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंवर बाई के गुजरने पर खेद प्रकट किया है।

प्रधानमंत्री ने इसी के साथ कहा, “भारत के दूरवर्ती गांव में रहने वाली करीब 106 साल की महिला न तो टेलीविजन देखती थी और न ही अखबार पढ़ती थी, लेकिन किसी न किसी तरह उस तक स्वच्छ भारत अभियान के तहत टॉयलेट बनवाने का संदेश पहुंचा। यही कारण है कि उसने अपने घर पर टॉयलेट बनवाने के लिए बकरियां बेच दीं और गांव के बाकी लोगों को भी अपने-अपने घर पर टॉयलेट बनवाने के लिए प्रेरित किया।”

पीएम आगे बोले, “मैं मीडिया के लोगों को बताना चाहूंगा कि वे मेरी कवरेज न करें, बल्कि इस महिला की कहानी को देश भर में फैलाने का काम करें।” इससे पहले, राज्य सरकार ने कुंवर बाई को स्वच्छ दूत के रूप में नियुक्त किया था, जिन्होंने पीएम मोदी और राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह से मुलाकात करने की इच्छा जताई थी। आपको बता दें कि 106 साल की इस बूढ़ी मां ने घर पर दो टॉयलेट के निर्माण के लिए अपनी आठ-10 बकरियां 22 हजार रुपयों में बेच दी थीं। कुर्रुभट गांव में आयोजित ‘रर्बन मिशन’ कार्यक्रम के दौरान उन्हें कोटभर्री गांव की ओर से सम्मानित किया गया था।

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