पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राज्य की राजनीति और पुलिस प्रशासन को हिला दिया है। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की जांच अब कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि यह हत्या पूरी प्लानिंग के साथ प्रोफेशनल सुपारी किलरों द्वारा अंजाम दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सीआईडी, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और बारासात जिला पुलिस की टीमों को मिलाकर एक हाई-लेवल एसआईटी बनाई गई है। जांच एजेंसियां अब चार संदिग्ध शूटरों की तलाश कर रही हैं।
घटना बुधवार रात करीब 10 बजे की है। चंद्रनाथ रथ अपनी कार से ऑर्चर्ड एस्टेट स्थित घर लौट रहे थे। उनके साथ ड्राइवर बुद्धदेब बेरा और एक अन्य व्यक्ति मिंटू भी मौजूद था। जैसे ही उनकी गाड़ी शेख मुजीब रोड पर पहुंची, एक सिल्वर रंग की हैचबैक कार ने रास्ता रोक लिया। उसी समय दो मोटरसाइकिलों पर सवार हमलावर पीछे से आए और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
करीब 50 सेकंड तक चली इस पूरी वारदात का पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए रीक्रिएशन तैयार किया है। जांच में सामने आया कि हमलावरों ने ग्लॉक 47X सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल से 8 राउंड फायर किए। इनमें से 6 गोलियां चंद्रनाथ रथ और उनके ड्राइवर को लगीं। रथ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। डॉक्टरों ने उसके शरीर से तीन गोलियां निकाल ली हैं, लेकिन उसकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। पीछे बैठे मिंटू ने सीट के नीचे झुककर अपनी जान बचाई।
पुलिस ने घटना के बाद एक हैचबैक कार और एक बाइक बरामद की है। लेकिन जांच में पता चला कि दोनों वाहनों की नंबर प्लेट नकली थीं। बाइक का चेसिस नंबर भी पूरी तरह मिटा दिया गया था, ताकि असली मालिक तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। जांच एजेंसियों का मानना है कि अपराधियों ने पहले से ही पूरी तैयारी कर रखी थी।
जांच के दौरान कार का रजिस्ट्रेशन नंबर सिलीगुड़ी का निकला। इसके बाद पुलिस ने विलियम जोसेफ नाम के व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। वह एक चाय बागान कर्मचारी हैं और शिवमंदिर इलाके में रहते हैं। हालांकि बाद में पता चला कि उनका इस हत्याकांड से कोई संबंध नहीं है।
पुलिस जांच में सामने आया कि विलियम जोसेफ ने कुछ दिन पहले अपनी कार बेचने के लिए ऑनलाइन विज्ञापन डाला था। शक है कि अपराधियों ने वहीं से नंबर प्लेट की जानकारी लेकर उसका गलत इस्तेमाल किया। जोसेफ ने बताया कि उनकी कार अभी भी उनके घर पर खड़ी है और इस घटना के बाद वह काफी डरे हुए हैं।
बरामद बाइक 2012 में आसनसोल के बर्नपुर निवासी बिभास भट्टाचार्य के नाम पर रजिस्टर्ड बताई जा रही है। लेकिन दिए गए पते पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने भी उस नाम के किसी व्यक्ति को पहचानने से इनकार कर दिया।
इस बीच सुवेंदु अधिकारी के करीबी दिपांकर अरोरा के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाल रही है और करीब 80 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण कर रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हत्या बेहद प्रोफेशनल तरीके से की गई और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ हो सकता है।
