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निलंबित विधायक परगट सिंह ने अकाली दल को बताया मानसिक रूप से दिवालिया पार्टी

परगट ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि अपने क्षेत्र के लोगों के हक में बोलना गलत है। यदि ये सब दल विरोधी है तो ठीक है और मैं उन्हें चुनौती देता हूं।

Author जलंधर | July 21, 2016 5:23 AM
प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते सुखबीर बादल। फोटो- टि्वटर/ एएनआई

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) निलंबित विधायक और पूर्व हाकी कप्तान परगट सिंह ने पार्टी को मानसिक रूप से दिवालिया करार देते हुए उसे चमचों और दलालों का दल बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब में शिअद की सत्ता से ज्यादा बुरा कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने अपनी भविष्य की योजना का खुलासा नहीं किया। सिंह ने शिअद में फिर से आने की संभावना से इनकार किया। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू के भी आम आदमी पार्टी (आप) में चले जाने की अटकलों पर परगट ने कहा कि यह अच्छा मेल होगा क्योंकि वह जबर्दस्त अटैकर हैं और मैं डिफेंडर।

आप में जाने की अटकलों के बारे में परगट ने कहा कि उन्हें मंगलवार रात में ही अपने निलंबन का पता चला है, इसलिए किसी भी फैसले के लिए थोड़ा समय लगेगा। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल खुद को सबसे ऊंचा समझते हैं पर जमीनी तौर पर विकास के दावों की हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां करती है।
जलंधर छावनी से विधायक परगट ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने सिर्फ अपने क्षेत्र के लोगों की मांगों और जरूरतों के लिए आवाज उठाई है। कभी पार्टी और उसके आला नेताओं के हितों के खिलाफ कुछ नहीं कहा, पर फिर भी उनकी गर्दन पर पार्टी से निलंबन की तलवार लटकाई गई जो सरासर दल की मानसिक दिवालिएपन को जाहिर करती है। उन्होंने कहा कि अब यह दल पूरी तरह से चमचों और दलालों का गढ़ बनकर रह गया।

परगट ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि अपने क्षेत्र के लोगों के हक में बोलना गलत है। यदि ये सब दल विरोधी है तो ठीक है और मैं उन्हें चुनौती देता हूं। मैंने जमशेर ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र, श्मशान समेत अपने क्षेत्र की भलाई के लिए 10 बिंदू उठाए थे। यहां तक कि पार्टी की बैठक में भी इन पर चर्चा की गई थी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मैंने भ्रष्टाचार और अपने क्षेत्र में बनाई जा रही करीब 200 अवैध इमारतों के खिलाफ आवाज बुलंद की थी पर इन सब की अनदेखी की गई।

राजनीति में बने रहने के बारे में परगट ने कहा कि पहले तो उन्होंने राजनीति को अलविदा कहने का सोचा था पर अब वह इसमें बने रहेंगे। उन्होंने आप या अन्य दल में जाने और जलंधर छावनी से चुनाव लड़ने की संभावना से भी इनकार किया है। बीते छह महीनों के दौरान मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के उनके क्षेत्र के दौरों पर भी अपनी गैर-मौजूदगी के बाद निलंबन के माहौल पर परगट ने कहा कि बीते तीन-साढ़े तीन साल के दौरान जब मेरे ही क्षेत्र में काम नहीं हो पाए तो मुझे भी गुस्सा जताने का हक है।

यह पूछे जाने पर कि मुख्यमंत्री ने जब खुद जमशेर कचरा संयंत्र नहीं लगाने की सार्वजनिक तौर पर घोषणा कर दी है तो गुस्से का क्या तुक। इस पर परगट ने कहा कि यह सिर्फ बोलने की बात है, असल में कागजी तौर पर कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ लोगों को बरगला रहे हैं, और कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि वह मंगलवार को चंडीगढ़ में ही थे और उन्हें निलंबन का पता नहीं था। उन्हें अखबारों में प्रकाशित बयानों से ही इस बारे में पता चला, जिनमें कहा गया कि मैं दिल्ली में था। जब प्रदेश सरकार के अपने ही खुफिया तंत्र तक को अपने विधायक की गतिविधियों का पता नहीं तो ये लोग सरकार क्या खाक चला रहे हैं?

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