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टैक्सियों के लिए सर्ज प्राइसिंग गलत तो रेल टिकट पर कैसे?

बुधवार को जारी रेल मंत्रालय की घोषणा के मुताबिक, 9 सितंबर से राजधानी, शताब्दी और दुरंतो में 90 फीसद सीटें 10 से लेकर पचास फीसद तक ज्यादा दाम पर बेची जाएंगी।

Author नई दिल्ली | September 9, 2016 4:34 AM

बुधवार को जारी रेल मंत्रालय की घोषणा के मुताबिक, 9 सितंबर से राजधानी, शताब्दी और दुरंतो में 90 फीसद सीटें 10 से लेकर पचास फीसद तक ज्यादा दाम पर बेची जाएंगी। इन प्रीमियम ट्रेनों में फ्लेक्सी फेयर सिस्टम लागू करने के पीछे रेलवे का तर्क है कि अतिरिक्त राजस्व का उपयोग इन ट्रेनों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। वहीं फैसले से प्रभावित जनता पूछ रही है कि ‘क्या यही है मोदी के अच्छे दिन’। फर्स्ट एसी और एग्जक्यूटिव क्लास को इस फैसले से बाहर रखने पर जनता सवाल कर रही है कि क्या आम आदमी को प्रीमियम ट्रेन में सफर का हक नहीं। बहुत से लोगों ने कहा कि अगर टैक्सियों के लिए सर्ज प्राइसिंग गलत है तो सरकारी संस्थान अपने यहां यह कैसे लागू कर सकती है।

रेल मंत्रालय के इस फैसले से रेलवे के इन प्रीमियम ट्रेनों का किराया लगभग सस्ते विमान किराए के बराबर हो जाएगा। फर्स्ट एसी और एग्जक्यूटिव क्लास को छोड़कर फ्लेक्सी दरों का प्रभाव दुरंतो जैसी ट्रेनों के बिना एसी की टिकटों समेत सभी श्रेणियों पर पड़ेगा। रेलवे इस फैसले के पीछे सुविधाओं को बढ़ाने और दलालों की घुसपैठ को खत्म करने का तर्क दे रहा है। उत्तरी रेलवे के सीपीआरओ नीरज शर्मा ने कहा, ‘इस फैसले से जो अतिरिक्त राजस्व आएगा उसका उपयोग सेवाओं को बेहतर करने और सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए किया जाएगा। वैसे भी काफी समय से किराया बढ़ा नहीं और सबसिडी दर पर ही ये ट्रेनें चल रही थीं’। नीरज शर्मा ने कहा, ‘अभी पैसेंजर ट्रेनों से रेलवे को 25 हजार करोड़ सालाना का राजस्व घाटा है। इस बढ़ोतरी से 300-400 करोड़ अतिरिक्त राजस्व आएगा जिससे घाटे पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन इन ट्रेनों की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी’।

हालांकि, ये प्रीमियम ट्रेनें हैं, लेकिन इनमें सफर करने वाला एक बड़ा तबका मध्य वर्ग का है। क्योंकि लंबी दूरी के सफर के लिए इस वर्ग के पास ट्रेन के अलावा कोई और विकल्प नहीं। इसलिए, समय पर पहुंचने या किसी आपात स्थिति में यह वर्ग इन सेवाओं का लाभ उठाता रहा है। दिल्ली में सीएसआइआर में काम करने वाले अजमत अली गुरुवार को दिल्ली-राजेंद्र नगर राजधानी से पटना रवाना हो रहे थे। वे पहली बार इसमें जा रहे हैं क्योंकि किसी और ट्रेन में उन्हें टिकट नहीं मिली और मंगलवार की बकरीद का त्योहार परिवार के साथ मनाने की उनकी दिली तमन्ना थी। अजमत ने कहा, ‘अकेला हूं इसलिए जा पा रहा हूं, परिवार के साथ तो अभी भी इस ट्रेन की सवारी नहीं कर पाता और किराया बढ़ने की स्थिति में तो अकेले भी नहीं कर पाउंगा। यह केवल बिजनेस क्लास को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया फैसला है’।

वहीं ट्रैवल बिजनेस के सिलसिले में अक्सर दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाले विनीत ने कहा, ‘महीने में चार-पांच बार चंडीगढ़ जाना पड़ता है। मैं अक्सर दिल्ली-कालका शताब्दी लेता हूं। लेकिन, अब तो इससे मेरी जेब पर काफी फर्क पड़ेगा। प्लेन का सफर भी इतना ही पड़ेगा, भविष्य में हो सकता है प्लेन से जाऊं’। वहीं दिल्ली-राजेंद्र नगर राजधानी से सपरिवार पटना जा रहे एसपी सिंह ने बताया, ‘सुविधाएं तो बढ़ती नहीं, राजधानी का खाना और टॉयलेट पिछले छह महीने में इतना गंदा हो गया है उस तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता। किराया बढ़ा लेंगे लेकिन सुविधाएं वही रहेंगी। रेलवे अपनी गड़बड़ियों को सुधारे, टिकट ट्रैवलिंग, दलालों पर शिकंजा कसे। क्या बढ़ी कीमत के एवज में हमेशा समय पर पहुंचाने की गारंटी लेगा रेलवे’।

अपने भाई को दिल्ली-हावड़ा राजधानी के लिए छोड़ने स्टेशन आए अनिल अग्रवाल ने बताया, ‘रेलवे सुविधाओं का तर्क दे रहा है, जबकि हकीकत यह है कि कई बार मुझे खराब खाना परोसा गया है। गंदगी में भी बी या सी ग्रेड दे सकता हूं। क्या केवल किराया बढ़ाने से ये चीजें बदल जाएंगी। क्या मोदी के अच्छे दिन यही हैं। सफाई का वादा करने वाली मोदी सरकार का पोल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के परिसर में घुसते ही खुल जाता है और यही नजारा प्लेटफॉर्म से लेकर ट्रेन के अंदर तक है’। अनिल पूछते हैं, ‘तत्काल कोटा और अन्य कोटा के बाद सामान्य सीटें बचती ही कितनी हैं, जो बचती हैं उनमें से 10 फीसद सीटें तो 1 मिनट में भर जाती हैं। अब भाग्य से ही इस पहले 10 फीसद में आ सकते हैं, नहीं तो बढ़ा हुआ किराया ही देना होगा, वो भी 10 फीसद या 50 फीसद पता नहीं’। उनका सवाल यह भी है कि सरकार को सुविधाओं के लिए पैसे चाहिए तो फर्स्ट एसी और एग्जक्यूटिव क्लास को क्यों छोड़ा, उनमें सफर करने वाला वर्ग ज्यादातर उच्च अधिकारी, रईस व्यापारी या राजनीतिज्ञ होते हैं’।

हालांकि, कुछ लोग इस फैसले का समर्थन इस आधार पर कर रहे हैं कि इतनी भीड़ में सुविधाओं के लिए ज्यादा कीमत तो चुकानी ही पड़ेगी। रेलवे कुछ चुनिंदा रूटों पर फ्लेक्सी प्राइसिंग की ट्रेनें बीच-बीच में जरूरत के हिसाब से चलाती रही है, लेनिक इतने बड़े पैमाने पर लिए गए इस फैसले से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होंगे। लिहाजा प्रतिक्रिया लाजमी है।

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