Supreme Court to hear on January 22 PILs seeking probe into judge Loya's death - Jansatta
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बी एच लोया की मौत की जांच वाली जनहित याचिका पर अब 22 जनवरी को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी एच लोया की कथित तौर पर रहस्यमयी तरीके से मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सुनवाई करने का निर्णय किया है।

Author नई दिल्ली | January 19, 2018 11:28 PM
22 जनवरी को होगी सीबीआई के पूर्व विशेष न्यायाधीश बी एच लोया की मौत के केस की सुनवाई

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी एच लोया की कथित तौर पर रहस्यमयी तरीके से मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सुनवाई करने का निर्णय किया है। उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई की तारीख 22 जनवरी तय की और याचिकाओं को किसी ‘‘उपयुक्त पीठ’’ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला और महाराष्ट्र के पत्रकार बी एस लोन की याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय की उपयुक्त पीठ सुनवाई करेगी।

याचिकाकर्ताओं के वकील रिपीट वकील ने कहा कि न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायामूर्ति एम एम शांतानागौदर की पीठ की तरफ से पारित आदेश के परिप्रेक्ष्य में वे सुनवाई की तारीख पर स्पष्टीकरण चाहते हैं। सीजेआई की पीठ ने कहा, ‘‘रोस्टर के मुताबिक 22 जनवरी 2018 को उपयुक्त पीठ के समक्ष मामले को सूचीबद्ध किया जाए।’’ इसने महाराष्ट्र सरकार पर यह निर्णय छोड़ दिया था कि लोया की मौत से जुडेÞ किन दस्तावेजों को याचिकाकर्ताओं को सौंपा जा सकता है।

गौरतलब है कि 15 जनवरी सोमवार को कांग्रेस ने न्यायाधीश बी.एच. लोया की मौत की जांच न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की थी। कांग्रेस ने इस बात से इंकार किया था कि वह इस मामले का राजनीतिकरण कर रही है, और कहा कि यह मामला भारतीय लोकतंत्र के एक प्रमुख अंग से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, कोई भी यह नहीं कह रहा है कि कांग्रेस पार्टी एक जांच आयोग गठित करेगी। यह पूरी चर्चा कि पार्टी मामले का राजनीतिकरण कर रही है, बिल्कुल झूठ है। सिंघवी ने कहा, “भारतीय लोकतंत्र का एक जिम्मेदार हिस्सा होने के नाते एक पार्टी के रूप में हम एक जांच की मांग कर रहे हैं। देश न्यायालय की निगरानी में एक जांच चाहता है।

उन्होंने कहा, “मेरी टिप्पणी का सर्वोच्च न्यायालय के संकट से कोई लेना-देना नहीं है। मैं समझता हूं कि इस देश के प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक राजनीतिक दल को उनके निधन की एक निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करने का स्वतंत्र रूप से अधिकार है। सिंघवी ने यह भी कहा, “यदि कोई मामला भारतीय लोकतंत्र के एक प्रमुख अंग से संबंधित हो, तो जिम्मेदार घटकों द्वारा जांच की मांग जायज है, और यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि परिवार का कोई सदस्य जांच चाहता है या नहीं।

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