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दिल्ली विवि के प्रोफेसर साईबाबा मामले की सुनवाई रोजाना हो : सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति जेएस केहर और न्यायमूर्ति सी नागप्पन की पीठ ने यह भी कहा कि वह निचली अदालत के अहम गवाहों का परीक्षण करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साईबाबा जमानत देने पर विचार कर सकती है।
Author नई दिल्ली | March 1, 2016 00:59 am
उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट)

जेल में बंद दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साईबाबा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र की निचली अदालत से कहा कि वह मामले में रोजाना मुकदमा चलाए और एक महीने में अभियोजन पक्ष के आठ प्रमुख गवाहों का परीक्षण करे। साईबाबा माओवादियों से कथित संबंध को लेकर मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति जेएस केहर और न्यायमूर्ति सी नागप्पन की पीठ ने यह भी कहा कि वह निचली अदालत के अहम गवाहों का परीक्षण करने के बाद जमानत देने पर विचार कर सकती है। इस बीच जजों ने सार्इंबाबा समेत सभी आरोपियों से कहा कि वे मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के साथ सहयोग करें। राज्य सरकार के वकील से चार अप्रैल को मुकदमे की तथ्यात्मक स्थिति भी बताने को कहा गया है।

पीठ ने कहा- हमने जवाबी हलफनामा और महाराष्ट्र सरकार द्वारा दायर अतिरिक्त हलफनामे का अध्ययन किया है। हमने याचिकाकर्ता के वकील को भी सुना है। यह सामने आया है कि अभियोजन पक्ष ने जिन 34 गवाहों का उल्लेख किया है, उनमें से कुछ अहम गवाहों का परीक्षण किया जा चुका है और आठ प्रमुख गवाहों का परीक्षण किया जाना बाकी है। बाद में जमानत देने पर विचार कर सकने का संकेत देते हुए अदालत ने महाराष्ट्र में गढ़चिरौली स्थित निचली अदालत को चार मार्च से रोजाना आधार पर मुकदमे की सुनवाई करने और चार अप्रैल तक आठ अहम गवाहों का बयान दर्ज करने का काम पूरा करने को कहा।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को जेल में बंद प्रोफेसर के लिए आवास का वैकल्पिक इंतजाम देखने को कहा था। जजों ने कहा था कि हम चाहते हैं कि राज्य उन्हें सहज बनाए। साथ ही राज्य को निर्देश दिया था कि वह उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करे। व्हील चेयर पर चलने वाले सार्इंबाबा फिलहाल नागपुर जेल में बंद हैं।

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