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Assembly Election 2018: फेक वोटर लिस्ट पर कांग्रेस नेताओं को सुप्रीम कोर्ट में झटका, खारिज हुईं याचिकाएं

कमलनाथ का दावा है कि वहां मतदाता सूची में भारी संख्या में फर्जी मतदाता मौजूद हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और सचिन पायलट की ओर से दायर दो अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और सचिन पायलट की ओर से दायर दो अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसमें चुनाव वाले राज्य मध्य प्रदेश और राजस्थान में मतदाता सूची का मसौदा टेक्स्ट फॉर्मेट में उपलब्ध कराने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई थी। मध्य प्रदेश में 28 नवंबर और राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव होना है।  न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की एक पीठ ने कहा, ‘‘हम इन याचिकाओं को खारिज करते हैं।’’ इन नेताओं ने अपनी याचिका में मतदाता सूची में कथित तौर पर मतदाताओं का नाम दो बार शामिल होने और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए शिकायतों का उचित समाधान करने की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय ने आठ अक्टूबर को इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

प्रदेशों में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और कमलनाथ का दावा है कि वहां मतदाता सूची में भारी संख्या में फर्जी मतदाता मौजूद हैं।  कांग्रेस नेता ने टेक्स्ट के रूप में मतदाता सूची मुहैया करवाने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि टेक्स्ट रूप में मतदाता सूची उपलब्ध होने से फर्जी मतदाताओं की पहचान की जा सकती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि वह राज्य की मतदाता सूची में करीब 60 लाख फर्जी मतदाताओं की पहचान कर चुके हैं।

निर्वाचन आयोग (ईसी) ने हालांकि कमलनाथ के तर्क का प्रतिवाद करते हुए न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ को बताया कि मतदाता सूची से 24 मतदाताओं का नाम कांग्रेस द्वारा मसले की जानकारी उन्हें देने के बाद नहीं हटाया गया बल्कि आयोग द्वारा मतदाता सूची की जांच के माध्यम से हटाया गया। मतदाता सूची में भारी तादाद में फर्जी मतदाताओं के मौजूद होने के बारे में कांग्रेस ने आयोग को तीन जून को जानकारी दी थी।

निर्वाचन आयोग की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस उस दस्तावेज पर विश्वास करती है जिसके बारे में वह जानती है कि वह सही नहीं है। उन्होंने पीठ को बताया कि यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 193 के तहत जानबूझकर भ्रामक दस्तावेज पेश करने का मामला बनता है।
आयोग ने मतदाताओं की निजता का अधिकार का हवाला देते हुए टेक्स्ट रूप में मतदाता सूची मुहैया नहीं करने के अपने फैसले का बचाव किया।

भाषा के इनपुट के साथ।

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