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Supreme Court ने भी खारिज की योगी के खिलाफ याचिका, हाई कोर्ट ने लगाया था 5 हजार का फाइन

Rajasthan के अलवर में 2018 में एक चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक भाषण देने का आरोप लगाया गया था।

Supreme Court ने भी खारिज की योगी के खिलाफ याचिका, हाई कोर्ट ने लगाया था 5 हजार का फाइन
Yogi Adityanath के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है (पीटीआई फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath) को बड़ी राहत दी है। दरअसल उनके खिलाफ एक याचिका डाली गई थी, जिसमे उनपर राजस्थान के अलवर में 2018 में एक चुनाव प्रचार के दौरान आपत्तिजनक भाषण देने का आरोप लगाया गया था। इसी को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता पर लग चुका है 5 हजार का जुर्माना

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ (Justices B R Gavai and Vikram Nath) की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है। बेंच ने कहा कि इस तरह के मुकदमे केवल पेज 1 (समाचार पत्रों के) के लिए हैं, इसे खारिज किया जाता है। याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के एक आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने उसकी याचिका खारिज कर दी थी और उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।

बता दें कि याचिका मऊ जिले (Mau district) के नवल किशोर शर्मा (Naval Kishor Sharma) ने दायर की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार योगी आदित्यनाथ ने 23 नवंबर 2018 को अलवर (Alwar) में एक चुनावी भाषण में उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी। याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत जाने से पहले भाषण के खिलाफ मऊ की जिला अदालत में परिवाद दायर किया था, जिसे खारिज कर दिया गया। उन्होंने तब इलाहबाद उच्च न्यायालय के समक्ष एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिसे भी क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के आधार पर खारिज कर दिया गया था।

अगस्त में भी ख़ारिज हुई थी एक याचिका

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक अपील को खारिज कर दिया था। दरअसल 2007 में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण (Hate Speech) देने के लिए योगी आदित्यनाथ ने अपने खिलाफ मुकदमा चलाने से इंकार कर दिया था। इसी के विरुद्ध याचिका दायर की गई थी। (यह भी पढ़ें: मुख़्तार अंसारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।)

तत्कालीन सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने बीते 24 अगस्त 2022 को मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने कहा कि इस मामले में मंजूरी देने से इनकार करने पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है।

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First published on: 23-01-2023 at 02:26:12 pm
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