Supreme court order to central government on child intoxication - Jansatta
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बच्चों के बीच बढ़ती नशे और शराब की लत को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश

उच्चतम न्यायालय ने आज केंद्र से कहा कि स्कूली बच्चों में बढ़ती नशे और शराब की लत पर रोक लगाने के लिए वह छह महीने के भीतर राष्ट्रीय कार्ययोजना पेश करे।

प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र से कहा कि वह देशभर में स्कूली बच्चों में शराब और मादक पदार्थों की लत और उनके इस्तेमाल पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण करवाए।

उच्चतम न्यायालय ने आज केंद्र से कहा कि स्कूली बच्चों में बढ़ती नशे और शराब की लत पर रोक लगाने के लिए वह छह महीने के भीतर राष्ट्रीय कार्ययोजना पेश करे। न्यायालय ने कहा कि एक बार ’’लत लग जाने के बाद उन्हें नशे का तस्कर’’ बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र से कहा कि वह देशभर में स्कूली बच्चों में शराब और मादक पदार्थों की लत और उनके इस्तेमाल पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण करवाए। कई निर्देश जारी करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘उन्हें नशे की लत लग जाने के बाद नशे का सौदागर बनने को प्रोत्साहित किया जाता है।’ स्कूली बच्चों को मादक पदार्थों की लत और इसके दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक करने के लिए पीठ ने उनके पाठ्यक्रम पर फिर से विचार करने का सुझाव दिया।

यह निर्देश गैर सरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से वर्ष 2014 में दायर की गई जनहित याचिका पर दिए गए हैं। यह संगठन नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का है। याचिका में संगठन ने बच्चों में मादक पदार्थों की लत पर राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाने का निर्देश देने की मांग की थी जिसमें पहचान, जांच, सुधार, काउंसेलिंग और पुनर्वास शामिल हो। इसके अलावा मादक पदार्थों के इस्तेमाल के दुष्प्रभाव पर आदर्श पाठ्यक्रम बनाने की भी मांग की गई थी। गैर सरकारी संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एच एस फुल्का ने देश के हर जिले में बच्चों के लिए विशेष इकाई वाले नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की भी मांग की।

गौरतलब है कि वर्तमान में न सिर्फ युवा वर्ग तरह-तरह की शराब और सिगरेट का सेवन करते हैं बल्कि अब इस तरह की हैबिट का शिकार बच्चे भी होने लगे हैं। मादक परार्थों का लत के चलते बच्चों के शरीर के विकास में बाधक बनते हैं। इस तरह के पदार्थों का सेवन करने से जब बड़ों की बॉडी के अंदर कई तरह की बीमारियां पनपने लगती हैं तो सोचने की बात है कि आखिरकार नाजुक बच्चों के शरीर पर इन चीजों का क्या दुष्प्रभाव हो सकता है। लिहाजा यह वजह है कि अब सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को लेकर सरकार को आगाह करना पड़ा।

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