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इंटरसेप्ट मामले में मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, 6 सप्ताह में मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय ने कम्प्यूटर प्रणालियों को इंटरसेप्ट करने, उन पर नजर रखने और उनके आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए 10 एजेंसियों को अधिकृत करने वाली सरकारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर केन्द्र को सोमवार को नोटिस जारी किया।

Author नई दिल्ली | January 14, 2019 1:53 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने कम्प्यूटर प्रणालियों को इंटरसेप्ट करने, उन पर नजर रखने और उनके आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए 10 एजेंसियों को अधिकृत करने वाली सरकारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर केन्द्र को सोमवार को नोटिस जारी किया। नोटिस थमाते हुए साथ ही में सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरदार से छह सप्ताह के भीतर इसका जवाब देने के निर्देश भी दिए हैं। आपको बता दें कि इस मामे को लेकर केन्द्र सरकार की 20 दिसंबर की अधिसूचना को चुनौती देते हुए न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी।

यह याचिका प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश की गई। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के तहत केन्द्र की 10 जांच एवं जासूसी एजेंसियों को कम्प्यूटरों को इंटरसेप्ट करने और उनके आंकड़ों का विश्लेषण करने का अधिकार प्राप्त हो गया है।

नए आदेश के तहत अधिसूचित 10 एजेंसियों में खुफिया ब्यूरो, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आय कर विभाग), राजस्व आसूचना निदेशालय, केन्द्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेन्सी, रॉ, सिग्नल खुफिया निदेशालय (जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर और असम में सक्रिय) और दिल्ली के पुलिस आयुक्त शामिल हैं। अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने अपनी याचिका में सरकार की अधिसूचना को ‘‘गैरकानूनी, असंवैधानिक और कानून के विपरीत’’ बताया है।

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