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सुप्रीम कोर्ट ने किया नामधारी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करने से इनकार

न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि हम याचिका पर विचार करने में रुचि नहीं रखते। आपके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

Author नई दिल्ली | June 9, 2016 12:14 AM
उच्चतम न्यायालय (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने यहां 2012 में हुई गोलीबारी की एक घटना, जिसमें शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा और उनका भाई हरदीप मारे गए थे, के आरोपी उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के बर्खास्त अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी की जमानत अर्जी पर विचार करने से बुधवार को यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं।

न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि हम याचिका पर विचार करने में रुचि नहीं रखते। आपके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। शीर्ष अदालत ने इस बारे में सख्ती से संज्ञान लिया कि नामधारी पहले निचली अदालत से स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत हासिल कर चुके हैं, जबकि उनकी नियमित जमानत अर्जी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित थी। पीठ ने कहा- यह अजीब है। निचली अदालत आपको अंतरिम जमानत देती है, जबकि जमानत याचिका हाई कोर्ट में लंबित है। नामधारी ने शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में कहा कि वह स्वस्थ नहीं हैं इसलिए मुकदमा लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत पर छोड़ा जाए।

निचली अदालत ने इस साल अपै्रल में नामधारी की अंतरिम जमानत को निरस्त कर दिया और उन्हें जेल भेज दिया था। निचली अदालत फिलहाल मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज कर रही है। अंतरिम जमानत को रद्द करते हुए निचली अदालत ने कहा था कि मामले में मुख्य फरियादी नंदलाल महतो अपने बयान से पलट गया था। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नामधारी ने उसे धमकाया हो या बयान से पलटने के लिए पैसा दिया हो।

नामधारी की अंतरिम जमानत को निरस्त करने की मांग वाली याचिका हरदीप की पत्नी ने निचली अदालत में दाखिल की थी। मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ता नामधारी को पिछले साल 27 नवंबर को स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया। आरोपी ने कहा था कि वह हेपेटाइटिस सी, रक्तचाप और हृदय संबंधी विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके अलावा हताशा व आत्महत्या करने की प्रवृत्ति के भी शिकार हैं।

संपत्ति के एक विवाद में कथित तौर पर शामिल पोंटी और हरदीप की 17 नवंबर, 2012 को यहां छतरपुर के एक फार्म हाउस में गोलीबारी में हत्या कर दी गई थी। बाद में 23 नवंबर, 2012 को नामधारी को गिरफ्तार किया गया। बाद में बाकी आरोपियों को पकड़ा गया। निचली अदालत ने पिछले साल जुलाई में नामधारी और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) सचिन त्यागी समेत सभी 21 आरोपियों के खिलाफ हत्या के साथ गैरकानूनी तरीके से जमा लोगों की ओर से किया गया अपराध के तहत आरोप तय किए थे।

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