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अरुणाचल में सरकार बनने का रास्ता साफ

शीर्ष अदालत ने यह आदेश गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश से संतुष्ट रहने के बाद दिया जिसमें कांग्रेस के 14 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के आदेश पर रोक लगा दी गई थी।

Author नई दिल्ली | February 19, 2016 3:13 AM
उच्चतम न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में यथास्थिति बरकरार रखने के अपने आदेश को रद्द करते हुए राज्य में सरकार के गठन का रास्ता साफ कर दिया। शीर्ष अदालत ने यह आदेश गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश से संतुष्ट रहने के बाद दिया जिसमें कांग्रेस के 14 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के आदेश पर रोक लगा दी गई थी। न्यायमूर्ति जेएस खेहर की अध्यक्षता वाले पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कांग्रेस के 14 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने संबंधी रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि पहली नजर में वह हाई कोर्ट के आदेश से संतुष्ट है। इस पीठ में न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति एनवी रमण भी शामिल हैं।

पीठ ने कहा-‘हाई कोर्ट के आदेश में हम दखल नहीं करेंगे। हम इससे संतुष्ट हैं। गुवाहाटी हाई कोर्ट के सात जनवरी के आदेश को देखने के बाद हमें लगता है कि उसमें इस मौके पर हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। उसी अनुसार अंतरिम आदेश को रद्द किया जाता है।’

पीठ ने 14 विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले को हाई कोर्ट के एकल पीठ से दो सदस्यीय पीठ के पास भेज दिया और उससे दो सप्ताह के भीतर इस पर फैसला करने को कहा। पीठ ने हालांकि यह साफ कर दिया कि इस विषय पर आगे कोई भी कार्यवाही न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के नतीजे पर निर्भर करेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के बुधवार को अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश करने के कुछ ही घंटे बाद शीर्ष अदालत ने संकट ग्रस्त राज्य में तब तक यथास्थिति बरकरार रखने को कहा था जब तक कि वह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया द्वारा कांग्रेस के 14 बागी विधायकों की अयोग्यता पर न्यायिक और विधानसभा के रिकॉर्ड का परीक्षण नहीं कर ले। अंतरिम आदेश तब आया था जब अरुणाचल कांग्रेस नेताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फाली एस नरीमन और कपिल सिब्बल ने अपनी याचिका में यथास्थिति बरकरार रखने को कहा था जब तक कि उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हो जाती। याचिका में राज्यपाल जेपी राजखोवा को अरुणाचल प्रदेश में नई सरकार को शपथ दिलाने से रोकने को कहा था।

पीठ ने अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के महासचिव और गुवाहाटी हाई कोर्ट की रजिस्टरी को निर्देश दिया था कि वह विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी संविधान की 10 वीं अनुसूची के तहत विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया द्वारा की गई कार्यवाही से संबंधित रिकॉर्ड शीर्ष अदालत तक सौंपे। पीठ ने हाई कोर्ट के महापंजीयक को निर्देश दिया था कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि 14 विधायकों को अयोग्य ठहराने से संबंधित रिकॉर्ड इस अदालत में पेश किया जाए। पीठ ने इस बात पर गौर किया था कि रिकॉर्ड का कुछ हिस्सा गुवाहाटी हाई कोर्ट के पास सुरक्षित रखा हुआ है।

नरीमन और सिब्बल ने पीठ के समक्ष यह भी उल्लेख किया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है। पीठ राज्य की संवैधानिक शक्तियों पर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। नरीमन ने कहा था कि राज्यपाल ने 26 जनवरी को मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर दिया था जब विधानसभा निलंबित थी। उन्होंने कहा था कि गुवाहाटी हाई कोर्ट को भी 14 विधायकों को अयोग्य ठहराने पर रोक नहीं लगानी चाहिए थी क्योंकि पार्टी के मुख्य सचेतक को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था। पीठ ने तब कहा था कि हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश इस आधार पर आया था कि इन 14 विधायकों को नोटिस नहीं दिया गया था।

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