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सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ से कहा- छह महीने में पूरी हो छात्रा के लापता होने की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने 23 नवंबर 2013 को मामला सीबीआइ को सौंपने का निर्देश दिया था। लेकिन एजंसी ने करीब डेढ़ साल बाद 14 फरवरी 2015 को मामला दायर किया।

उच्चतम न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को बिहार के मुजफ्फरपुर से 12 साल की एक स्कूली छात्रा, नवरुणा चक्रवर्ती, के रहस्यमय रूप से लापता होने की घटना की जांच छह महीने के अंदर पूरी करने को कहा है। सीबीआइ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने वाले लोगों में शामिल अभिषेक रंजन ने कहा कि मामले की जांच पूरी होने के संबंध में अदालत के पूछने पर सीबीआइ के वकील ने 31 दिसंबर तक का समय मांगा। लेकिन अदालत ने इसे 31 अक्तूबर 2016 तक पूरा करने का निर्देश दिया। नवरुणा 18-19 सितंबर 2012 की रात से लापता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 23 नवंबर 2013 को मामला सीबीआइ को सौंपने का निर्देश दिया था। लेकिन एजंसी ने करीब डेढ़ साल बाद 14 फरवरी 2015 को मामला दायर किया। बिहार पुलिस ने अपनी जांच में शुरुआत में दावा किया कि अपराध के पीछे किसी तरह की रंजिश है। बिहार पुलिस ने कहा था कि तीन अपराधियों ने नवरुणा के घर में घुसने के बाद उसे बेहोश किया और चादर में लपेटकर उसे उठाकर ले गए।

पुलिस का कहना कि पीड़िता के पिता अतुल्य चक्रवर्ती का घर बड़े भूभाग में फैला है और उनके पास और भी संपत्ति है। स्थानीय बाहुबलियों की उन पर नजर थी और उन्होंने संपत्ति हासिल करने के उद्देश्य से लड़की का अपहरण किया था। बाद में पुलिस ने कहानी बदलते हुए दावा किया कि सेंट जेवियर स्कूल की 8वीं कक्षा की छात्रा नवरुणा का कथित रूप से किसी लड़के के साथ प्रेम प्रसंग था और वह उसके साथ भाग गई।

पीड़िता के परिवार ने इसके बाद सोशल मीडिया का सहारा किया और बिहार के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय को कई पत्र लिखे और साथ ही दूसरे मंचों पर भी मामला उठाया। दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि छात्र अभिषेक रंजन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामला सीबीआइ को सौंप दिया। सीबीआइ ने मामला हाथ में लेने के बाद पीड़िता के घर के पीछे के गटर में एक मानव कपाल पाया और उसके पीड़िता के होने का दावा किया। सीबीआइ ने मुजफ्फरपुर की विशेष अदालत को अपनी फोरेंसिक रिपोर्ट सौंपी थी लेकिन कोई आरोप पत्र दायर नहीं किया। इसके बाद अभिषेक ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए वहां अवमानना याचिका दायर की।

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