अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद महाराष्ट्र में वित्त विभाग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यह विभाग 2023 से ही अजित पवार के पास था। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ तो दिला दी गई है लेकिन अहम वित्त विभाग अभी मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के पास ही रहेगा। मार्च में महाराष्ट्र का बजट पेश होने वाला है और इसे मुख्यमंत्री फड़नवीस ही पेश करेंगे। हालांकि वित्त विभाग को मुख्यमंत्री के पास रखने के संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसका मतलब है कि वित्त विभाग का आवंटन अभी अनिश्चित है।
एनसीपी नेताओं ने मुख्यमंत्री के सामने क्या प्रस्ताव रखा?
राज्य सरकार के सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “बजट सत्र में 20 दिन बचे हुए हैं और ऐसे में यह महसूस किया गया कि मुख्यमंत्री को वित्त विभाग का प्रभार संभालकर 2026-27 का बजट पेश करना चाहिए। एनसीपी नेताओं ने एक बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष यह प्रस्ताव रखा। सर्वसम्मति और सामूहिक निर्णय के बाद फड़नवीस बजट पेश करने के लिए सहमत हो गए।” हालांकि अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि फड़नवीस द्वारा बजट पेश किए जाने का यह अर्थ नहीं है कि वित्त मंत्रालय एनसीपी के कोटे से हटा दिया गया है। बजट को ध्यान में रखते हुए फड़नवीस ने वित्त मंत्रालय को अस्थायी रूप से अपने पास रखा है।
महायुति के सूत्रों के अनुसार, “बजट सत्र समाप्त होने के बाद वित्त मंत्रालय पर अंतिम निर्णय गठबंधन सहयोगी एनसीपी से बात कर फड़नवीस द्वारा लिया जाएगा।” बजट बनाने के लिए अनिवार्य पूर्व-बजट प्रक्रिया की शुरुआत दिवंगत अजीत पवार ने कर दी थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से बात करने के बाद अंतिम दिशा-निर्देश प्रस्तावित किए थे।
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सुनेत्रा के पास आबकारी और खेल मंत्रालय
शनिवार को सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें आबकारी और खेल मंत्रालय आवंटित किए गए हैं। एनसीपी नेताओं का मानना था कि आर्थिक विशेषज्ञता के बिना मंत्रियों के लिए बजट तैयार करना मुश्किल होगा। जबकि फड़नवीस राज्य के वित्त से संबंधित हर पहलू से भलीभांति परिचित हैं।
मुख्यमंत्री फड़नवीस ने मीडिया को बताया कि अजित पवार ने बजट बनाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी योजनाओं, दिशा-निर्देशों और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाया जाए। पिछले बजट 2025-26 में एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने के लिए सात सूत्रीय विकास एजेंडा प्रस्तावित किया गया था।
बढ़ते खर्च और घटते राजस्व के साथ फड़नवीस को बजट बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकलुभावन योजनाओं में कटौती करके विकास परियोजनाओं के लिए अधिक पूंजी आवंटन सुनिश्चित करना है। अगले साढ़े तीन सालों तक कोई चुनाव नहीं होने के कारण राज्य सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह वित्तीय अनुशासन में सुधार लाने के लिए चरणबद्ध तरीके से विभागीय कटौती लागू करके अतिरिक्त खर्च को कम करने के लिए कड़े कदम उठाएगी। पढ़ें क्या डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए तैयार नहीं थीं सुनेत्रा पवार
