IMD Forecast for Summer 2026: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को अपने महीने के अनुमान में कहा कि मार्च और मई के बीच देश के अधिकतर हिस्सों में लोगों को सामान्य से अधिक दिन लू के थपेड़े झेलने पड़ सकते हैं। इनमें पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिणी व पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं।
आवश्यक सेवाओं को हो सकता है बड़ा खतरा
मौसम विभाग के मुताबिक फरवरी में पूरे भारत में कहीं शीत लहर नहीं चली, दिन का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने संवाददाताओं से कहा कि मार्च-अप्रैल-मई के दौरान ‘हीटवेव’ (लू) की बढ़ती संभावना से सार्वजनिक स्वास्थ्य, पानी के स्रोत, बिजली की मांग और आवश्यक सेवाओं को बड़ा खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों, बच्चों, बाहर काम करने वालों और बीमार लोगों पर इसका असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि मार्च के दौरान उत्तर-पूर्व, पूर्वी भारत, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और मध्य व प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है। इस बीच, उत्तर-पश्चिम भारत, दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वी तट के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रहने की संभावना है, जहां मार्च के दौरान सामान्य या सामान्य से कम न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है।
सामान्य से कम बारिश हो सकती है
महापात्रा ने कहा कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि मार्च 2026 के दौरान भारत में औसत बारिश सामान्य रहने की सबसे अधिक संभावना है। 1971 से 2020 के डेटा के आधार पर मार्च के दौरान देश में बारिश का औसत लगभग 29.9 मिलीमीटर है। मार्च में देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद है, लेकिन उत्तर-पूर्व भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और पूर्व मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने यह भी बताया है कि अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत में कमजोर ला नीना की स्थिति बनी हुई है। लेकिन वैश्विक मॉडल और भारत मौसम विज्ञान विभाग के ‘मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम’ के अनुमान के मुताबिक आने वाले महीनों में ‘न्यूट्रल अल नीनो सदन ऑसिलेशन’ की स्थिति वापस आ सकती है। फरवरी में मौसम की स्थिति की समीक्षा करते हुए विभाग ने कहा कि पिछले महीने पूरे भारत में बारिश 2001 के बाद सबसे कम थी। फरवरी में पूरे भारत में कहीं शीत लहर नहीं चली, दिन का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया।
विभाग ने कहा कि किसी भी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का न होना और पूर्वी (हवाओं) के साथ उनका मिलना जुलना न होना, मार्च में हल्की बर्फबारी/बारिश की मुख्य वजह हैं।
दक्षिण प्रायद्वीप और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर, देश के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा अधिकतम तापमान रहा। पूर्वी प्रायद्वीप और पूर्वी-मध्य भारत को छोड़कर भारत के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने कहा कि फरवरी के दौरान, भारत में 1901 के बाद से 10वां सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान, तीसरा सबसे ज्यादा न्यूनतम तापमान और पांचवां सबसे ज्यादा औसत तापमान रहा।
