37 साल पहले कैप्टन ने छोड़ा था कांग्रेस का साथ, जानें क्यों हुए थे अकाली दल में शामिल

साल 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार से नाराज होकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। (फोटो- पीटीआई)

40 से ज्यादा कांग्रेस विधायकों की नाराजगी का सामना कर रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद उनके कांग्रेस छोड़ने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि उन्होंने फ़िलहाल ऐसी किसी तरह की संभावनाओं से इनकार करते हुए कहा है कि वे अब भी कांग्रेस पार्टी में हैं। पंजाब में कांग्रेस को सत्ता दिलाने की कुंजी माने जाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह 37 साल पहले कांग्रेस पार्टी छोड़कर अकाली दल में शामिल हो गए थे। लेकिन कुछ साल बाद वे वापस से कांग्रेस पार्टी में लौट आए थे। आइये जानते हैं कि आखिर वे क्यों कांग्रेस छोड़कर अकाली दल में शामिल हुए थे।

कैप्टन अमरिंदर सिंह साल 1963 में एनडीए से पासआउट होने के बाद भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बाद में उन्होंने सेना से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन 1965 के दौरान जब जंग के हालात बने तो उन्हें वापस से सेना में बुला लिया गया। हालांकि इसके बाद भी वे भारतीय सेना की नौकरी छोड़ कर वापस लौट आए। 70 के दशक में जब पंजाब में अकाली दल की लोकप्रियता बढ़ रही थी और तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा था तो दिवंगत कांग्रेस नेता राजीव गांधी ने अपने स्कूली मित्र को कांग्रेस में शामिल होने के लिए कहा।

राजीव गांधी के ये स्कूली मित्र भारतीय सेना के पूर्व कैप्टन और पटियाला राजघराने के युवराज कैप्टन अमरिंदर सिंह ही थे। अमरिंदर सिंह अपने मित्र के कहने पर कांग्रेस में शामिल हो गए। राजीव गांधी के कहने पर ही उन्होंने पटियाला लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। लेकिन वे उस समय के बड़े अकाली नेता गुरचरण सिंह टोहरा से चुनाव हार गए। बाद में जब 1980 में फिर से लोकसभा के चुनाव घोषित हुए उन्होंने दोबारा से पटियाला लोकसभा क्षेत्र से ही चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर सांसद बन गए।

इसके बाद 1984 का साल आया जिसे भारतीय राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। कभी कांग्रेस के करीबी रहे जनरैल सिंह भिंडरावाले जब कांग्रेस पार्टी का सिरदर्द बनने लगे और पंजाब पूरी तरह से अशांत हो गया तो तत्कालीन इंदिरा गांधी के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए स्वर्ण मंदिर के अंदर भारतीय सेना की टुकड़ी भेज दी। इसे ऑपरेशन ब्लू स्टार का नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में जनरैल सिंह भिंडरावाला मारा गया और सिखों के पवित्र स्थान स्वर्ण मंदिर को खूब क्षति पहुंची। 

ऑपरेशन ब्लू का प्रभाव कांग्रेस पार्टी पर भी पड़ा। उस समय पंजाब कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा बन चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया और उन्होंने कांग्रेस पार्टी भी छोड़ दी। इसके बाद वो अकाली दल में शामिल हो गए। कैप्टन तलवंडी साबू से जीतकर विधानसभा पहुंचे और तत्कालीन अकाली सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बनाए गए। लेकिन जल्दी ही अकाली दल से भी उनका मोहभंग हो गया। 1992 में उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया और शिरोमणि अकाली दल (पंथिक) नाम की पार्टी बनाई। जिसका 1998 में कांग्रेस में विलय कर दिया।

दोबारा में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें बड़ा पद दिया गया। साल 1999 में कांग्रेस ने पहली बार कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 2002 में भी कैप्टन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने और विधानसभा चुनाव में पार्टी को 62 सीटें दिलाई। कांग्रेस पार्टी को मिली जीत के बाद उन्हें 2002 में मुख्यमंत्री पद का जिम्मा दिया गया और वे 2007 तक इस पद पर बने रहे। साल 2017 में मोदी लहर होने के बावजूद जब दोबारा से कांग्रेस की सरकार आई तो एकबार फिर से कैप्टन को मुख्यमंत्री बनाया गया। साल 2017 में कांग्रेस ने कैप्टन के नेतृत्व में ही पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ा था और 80 सीटें जीती थी।

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