ताज़ा खबर
 

आसमानी वादे और जमीनी हकीकत

एक बंगला बने न्यारा...इस सपने के लिए दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा से बेहतर जगह और क्या हो सकती थी।

Author नई दिल्ली | January 5, 2017 1:43 AM
(express Photo)

एक बंगला बने न्यारा…इस सपने के लिए दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा से बेहतर जगह और क्या हो सकती थी। यहां अरबों रुपए की परियोजनाएं शुरू भी हुर्इं लेकिन सपनों की सुपुर्दगी में बहुत ज्यादा देर पिछले साल सवालों के घेरे में रही थी। और अब तो फरवरी में ही चुनावी साइकिल चल जाएगी उसके बाद ही इन सपनों का भी हस्र तय होगा। तो 2017 के नोएडा के सपने अब बहुत कुछ नई सरकार पर निर्भर करेंगे। मेट्रो ट्रेन के साथ ही उत्तर प्रदेश आधुनिकता के नए युग में प्रवेश कर रहा है और इससे जुड़ी परियोजनाओं को समय से पूरा करने पर भी नजर रहेगी। बिल्डरों और खरीदारों के बीच बिगड़ते रिश्ते को सुधारना भी बंद से पड़े रियल एस्टेट बाजार को में नई जान डालने के लिए अहम है। तो नोएडा को लेकर आगामी सरकार बनाम चुनौतियों पर डाल लें एक नजर।

गगनचुंबी परियोजनाओं का अधूरा सफर
उप्र के सर्वाधिक विकसित और प्रमुख औद्योगिक महानगर नोएडा में 2016 जमीनी स्तर पर अरबों-खरबों की जिन विकासशील परियोजनाओं पर काम हुआ है, उन्हें जनता को सुपुर्द करना संकट से जूझ रही प्रदेश सरकार समेत नोएडा प्राधिकरण के लिए चुनौती होगी। दीगर है कि मौजूदा उप्र सरकार की शुरुआत उपेक्षा का शिकार हुए नोएडा में अखिलेश ने देर से मगर बहुत तेज साइकिल दौड़ाई। शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं से सुसज्जित करने के लिए मेट्रो समेत दर्जनों परियोजनाएं अभी आधी- अधूरी हैं। हालांकि इन पर तेजी से काम चल रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि 2017 में ज्यादातर बड़ी विकास परियोजनाएं पूर्ण होकर लोगों को सुविधा देने लगेंगी। वहीं, दूसरी तरफ कुछ दिनों पहले तक सब कुछ तय समय सारणी के हिसाब से चल रही योजनाओं पर लखनऊ में चल रहे गतिरोध का असर पड़ने की आशंका से लोग सहम रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से कुछ दिनों पहले ही अखिलेश यादव ने नोएडा समेत ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण से जुड़ी 21 विकासशील परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण लखनऊ से किया है। जानकारों का मानना है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा सिटी बस सेवा, एनएच- 24 से नोएडा- गाजियाबाद आना-जाना ट्रैफिक सिग्नल मुक्त कराने के लिए शुरू हुए मॉडल टाउन अंडर पास, शहर की पहली एलिवेटेड रोड का कुछ हिस्सा भले ही लोगों को सुविधा देने के नाम पर खोल दिया गया है। लेकिन इन सभी को पूरी तरह से जनसुविधा उपयोगी बनाना भी अधिकारियों के लिए चुनौती पेश करेगा।
खरीदारों की अटकी फ्लैटों की चाबी
2017 में खरीदारों को फ्लैटों की चाबी मिलने की उम्मीद पर एक बार फिर से पानी फिर गया है। पूरे साल तमाम कारणों से कभी चले और बंद रहा बिल्डर परियोजनाओं का काम 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद पूरी तरह से ठप पड़ गया है। जिन फ्लैटों का कब्जा 2016 के आखिर में मिलना तय था, उन बिल्डरों ने भी खरीदारों को करीब एक से डेढ़ साल तक सब्र करने को कहा है। इससे न केवल नोएडा-ग्रेटर नोएडा का रियल एस्टेट बाजार ठप पड़ गया है। बल्कि कई सालों पहले फ्लैट की पूरी कीमत दे चुके खरीदार ठगा महसूस कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि बंद पड़े निर्माण कार्य को जल्द शुरू कराकर खरीदारों का विश्वास दोबारा पैदा करने में सरकार और प्राधिकरण अफसरों को अहम किरदार निभाना होगा।
किसानों से जुड़े मामले अगली सरकार के हवाले
शहर की बेशकीमती हुई जमीन को देने वाले किसानों को उनके तय हक को दिलाने का दावा अब उप्र में बनने वाली नई सरकार की होगी। दिसंबर, 2016 में लखनऊ में हुई बोर्ड बैठक में चुनावों को ध्यान में रखते हुए करीब 2 हजार किसानों को 5 फीसद के भूखंड सेक्टर- 145 में दिए जाने का फैसला तो ले लिया गया है। अलबत्ता उस फैसले के तहत किसानों को किन्हें, कहां और कैसे भूखंड आबंटित किए जाएंगे, इसे किसान नहीं बल्कि अधिकारी तय करेंगे। ऐसे में किसानों को उनके हक दिलाना भी इस साल की चुनौती रहेगी। उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ने किसानों को 10 फीसद की जगह केवल 5 फीसद जमीन के ही भूखंड देने पर रजामंदी जताई है। शेष 5 फीसद की एवज में किसानों को नकद भुगतान करने का निर्णय लिया गया है। अधिग्रहीत जमीन की किस दर पर किसानों को 5 फीसद भूखंड के सापेक्ष प्राधिकरण भुगतान करेगी, यह अभी तक तय नहीं है।
किन शर्तों पर जमीन वापस करेंगे बिल्डर
प्रॉपर्टी कारोबार में मंदी और नोटबंदी के साथ महंगे सर्कल रेट से बिल्डर परियोजनाओं पर चौतरफा मार पड़ी है। तमाम परियोजनाओं का काम बंद होने या जमीन के विवादों में फंसने से हजारों खरीदारों की रकम डूब गई है। वहीं बड़े भूखंड आबंटित कराने वाले बिल्डरों को प्राधिकरण ने हाल ही में किश्त या भुगतान के एवज में जमीन का कुछ हिस्सा वापस सौंपने के प्रस्वात को मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि ज्यादातर बड़े बिल्डर मौजूदा हालात को देखते हुए परियोजना की जमीन का हिस्सा वापस सौंपने को तैयार हैं। किन शर्तों पर प्राधिकरण जमीन वापस लेगा और दोबारा वापस लेने के खेल में खरीदारों के क्या हित प्रभावित होंगे, इसका सर्वमान्य हल तैयार करना प्राधिकरण, खरीदारों और बिल्डरों के लिए चुनौती होगी।
अधिकारियों की तैनाती पर हाई कोर्ट और सरकार में रही खींचतान
नोएडा चैयरमेन के रूप में रमा रमण की तैनाती 2016 में प्रदेश सरकार और न्यायालय के बीच खींचतान के रूप में पहचाना जाएगा। रमा रमण की नोएडा में लंबे समय तक तैनाती को लेकर डाली गई पीआईएल पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1 जुलाई 2016 को शक्ति जब्त करने का आदेश दिया था। प्रदेश सरकार ने रमा रमण की नोएडा में तैनाती को मेट्रो समेत तमाम विकासशील परियोजनाओं के लिए जरूरी बताते हुए कोर्ट में तर्क रखे थे। उस समय रमा रमण नोएडा के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण के चेयरमैन के अलावा नोएडा सीईओ थे। 4 जुलाई को सरकार ने झुकते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रवीर कुमार को नोएडा का चेयरमैन बनाया था। जबकि रमा रमण को नोएडा सीईओ पर यथावत रखा था। 16 अगस्त को प्रदेश सरकार ने प्रवीर कुमार की जगह ऊर्जा सचिव समेत कई विभागों का कार्यभार संभाल रहे आइएएस संजय अग्रवाल को तीनों प्राधिकरणों का चेयरमैन नियुक्त किया था। 25 अगस्त को एसीईओ पीके अग्रवाल को नोएडा का सीईओ का कार्यभार मिला था। 20 सितंबर को हाई कोर्ट ने रमा रमण संबंधी मामले पर अंतिम सुनवाई करने हुए समाप्त किया। जिसके बाद उनकी तैनाती नोएडा चेयरमैन के रूप में दोबारा हुई। हालांकि नोएडा सीईओ का कार्यभार पीके अग्रवाल पर ही रहा। वहीं ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण के चेयरमैन का प्रभार संजय अग्रवाल के पास रहा। 20 दिसंबर को फिर फेरबदल करते हुए सरकार ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ दीपक अग्रवाल को नोएडा सीईओ की भी जिम्मेदारी सौंपी है।
अच्छे वक्त का सपना देखते हुए बीता 2016
प्राधिकरण अधिकारियों ने माना है कि 2016 में भले ही बड़ी परियोजनाओं का जनता को जमीनी स्तर पर फायदा नहीं मिला है, लेकिन मौजूदा साल में काम पूरा होने के बाद तस्वीर पूरी तरह से बदल जाएगी। इनमें एमपी-2 मार्ग पर बन रही एलिवेटेड रोड, सेक्टर- 18 में जाम मुक्ति के लिए बहुमंजिला पार्किंग, प्रस्तावित 100 किलोमीटर में से शेष 35 किलोमीटर साइकिल ट्रैक का निर्माण, 25 हजार दर्शकों की क्षमता वाले क्रिकेट स्टेडियम में मैच, सेक्टर- 51 में बालिका इंटर कॉलेज, सेक्टर- 33 में यूपी शिल्पहाट, सेक्टर- 34 में नारी निकेतन, सेक्टर- 39 में अंतरराष्ट्रीय स्तर की जिला अस्पताल इमारत, सेक्टर- 94 में अत्याधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम और सेक्टर- 108 में ट्रैफिक पार्क शामिल है

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App