कहानी बीहड़ के बागी कीः कभी वसुंधरा का महल उड़ाने की दे डाली थी धमकी, संसद में उठी थी एनकाउंटर की मांग; अब हिफाजत को दर-दर भटक रहा

राजस्थान के पूर्व दस्यु जगन का कहना है कि उसे जेल से छूटने के बाद लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। हालांकि, एक समय करीब 91 मामलों में आरोपी बनाए गए जगन की अब पुलिस भी सुनवाई नहीं कर रही।

Jagan Gurjar, Rajasthan
जगन गुर्जर ने 2019 में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था, उस पर 91 मामले दर्ज थे। (फोटो- ट्विटर/D_Police)

राजस्थान के बीहड़ों में ढाई दशक तक आतंक फैलाने वाला एक बागी अब जेल से बाहर आने के बाद खुद अपने और अपनी सुरक्षा के लिए परेशान है। यह बागी है पूर्व दस्यु जगन गुर्जर, जो करीब 27 साल पहले 1994 में अपराध की दुनिया में आया और अब अलग-अलग मामलों में बरी होने या जमानत पाने के बाद अपनी जान के खतरे की शिकायत लेकर पुलिस के पास भटक रहा है। हालांकि, आलम यह है कि पुलिस भी जगन की मदद के लिए आगे नहीं आ रही।

कौन है जगन गुर्जर?: जगन गुर्जर की अपराध की दुनिया में एंट्री अपने जीजा के हत्यारों को मारने के बाद हुई थी। उसने बीहड़ों में जाकर अपना गिरोह बना लिया और धौलपुर के डांग को अपना ठिकाना बनाया। बताया जाता है कि उस वक्त गुर्जर की डकैती के खौफ से कई गांवों में शादियां तक होनी बंद हो गई थीं। उसका डर ऐसा था कि न तो उसके गांव में 10 साल तक शादी हुई और उसके गांववालों के साथ उसके पिता तक गांव छोड़कर चले गए। इस दौरान जगन पर एक पुलिसकर्मी की हत्या और महिलाओं से दुर्व्यव्हार के आरोप लगे और देखते ही देखते उस पर 91 मामले दर्ज हो गए।

जगन का नाम देशभर में चर्चा में तब आया, जब उसने 2008 के आरक्षण आंदोलन के दौरान राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी दे डाली थी। पुलिस ने उस पर 11 लाख रुपए का इनाम रखा था और वह चंबल का सबसे बड़ा दस्यु बन गया था। बताया जाता है कि बाद में जब उसकी पत्नी उपचुनाव हार गई, तो जगन ने फिर बंदूक उठा ली। महिलाओं के साथ बदसलूकी करने के मामले में उसके एनकाउंटर तक की मांग उठी। जगन इकलौता ऐसा डकैत रहा, जिसके एनकाउंटर की मांग संसद तक में उठ चुकी है।

अब जमानत पर बाहर, लेकिन कोई मदद के लिए तैयार नहीं: 2019 में जगन ने चौथी बार सरेंडर कर दिया। इससे पहले वह जब भी जेल से निकला था, हर बार उत्पात मचाता हुआ अपराध की दुनिया की तरफ मुड़ गया था। हालांकि, पिछले दो साल जेल में बंद रहने के बाद अब कोर्ट ने 85 मामलों में गवाह और सबूत न मिलने के बाद उसे बरी कर दिया है। छह और मामलों में उसे जमानत भी मिल गई है। लेकिन अपने परिवार की हिफाजत के लिए उसे दर-दर भटकना पड़ रहा है।

जगन का कहना है कि जेल से छूटने के बाद लगातार उसे जान से मारने व बंदूक लेकर मुकाबला करने के लिए चुनौतियां मिल रही हैं। उसने फोन और सोशल मीडिया के जरिए ऐसा होने के सबूत भी पुलिस को दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थाने में जाने पर पुलिस कहती है कि उसकी तीन राज्यों में दहशत थी, इसलिए उसे कोई नहीं मार सकता। जगन का कहना है कि उसका बेटा 10वीं में पढ़ता है। अगर किसी झूठे मामले में 14-15 साल के बच्चे को फंसाएंगे तो वो भी बागी बन जाएगा। लेकिन वे ऐसा नहीं चाहते। जगन ने कहा कि परिवार के लालन-पालन के लिए किसी ने नरेगा तक में काम नहीं दिया।

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट