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CBI ने एक तीर से साधे कई निशाने

यादव सिंह मामले में सीबीआइ ने आनन-फानन में चार्जशीट दायर की है। लेकिन चार्जशीट में उल्लेखित 3 सहायक परियोजना अभियंता के नामों का खुलासा नहीं किया है।

Author नोएडा | March 17, 2016 3:18 AM
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो

यादव सिंह मामले में सीबीआइ ने आनन-फानन में चार्जशीट दायर की है। लेकिन चार्जशीट में उल्लेखित 3 सहायक परियोजना अभियंता के नामों का खुलासा नहीं किया है। इस कारण बुधवार को दिन भर संभावित नामों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। साथ ही गिरफ्तारी की आशंका के कारण प्राधिकरण अफसरों में बैचेनी बढ़ गई है।

जानकारों के मुताबिक, सीबीआइ ने चार्जशीट दायर कर एक ही तीर से कई निशाने किए हैं। एक तरफ जहां यादव सिंह की पत्नी को सह आरोपी माना है, वहीं प्राधिकरण के 9 अफसरों समेत तीन निजी निर्माण कंपनियों के मालिकान की घोटाले में मिलीभगत होने का दावा किया है। सीबीआइ ने 2011 में 954 करोड़ रुपए के भूमिगत केबल बिछाने के ठेकों को नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनियों को दिए थे। जिससे 19 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। वहीं, सीबीआइ ने मामले से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले और 2011 के बाद यादव सिंह की तरफ से आबंटित ठेकों की जांच आगे जारी रखने से सभी अफसरों में बैचेनी पैदा कर दी है।

सीबीआइ ने मंगलवार को यादव सिंह के अलावा 13 अन्य लोगों के नाम की चार्जशीट कोर्ट में दायर की थी। जिसमें चीफ इंजनियर यादव सिंह, उनकी पत्नी कुसुम लता, परियोजना अभियंता रामेंद्र सिंह, सहायक परियोजना अभियंता डीआर आर्य व जयपाल सिंह, जूनियर इंजीनियर राजीव कुमार, आरडी शर्मा व ओमपाल सिंह, तिरुपति कंस्ट्रक्शन के वीके गोयल, जेएसपी कंस्ट्रक्शन के पंकज जैन, एनकेजी के एमडी प्रदीप गर्ग समेत प्राधिकरण के इलेक्ट्रिकल एंड मेंटिनेंस डिपार्टमेंट के तीन एपीई नाम हैं। भ्रष्टाचार निवारक कानून के तहत उन पर कार्रवाई होगी। 954 करोड़ रुपए के बिजली के भूमिगत केबल बिछाने के काम का ठेका प्राधिकरण ने मार्च 2011 में जारी किया था। नवंबर 2011 में निजी कंपनियों को इस काम का ठेका दिया गया था। जबकि ठेका देने तक 2011 में 60 फीसद काम पूरा हो चुका था।

2012 में उप्र में सपा सरकार के आने के बाद तत्कालीन प्राधिकरण चेयरमैन राकेश बहादुर और मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजीव सरन ने केबल बिछाने के काम में घोटाले के कारण जून में यादव सिंह को निलंबित कर थाना सेक्टर-20 में केस दर्ज कराया था। जिसकी जांच बाद में सीबीसीआइडी को सौंपी गई थी।

2014 में यादव सिंह की सपा सरकार के कार्यकाल में प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर के रूप में तैनाती हुई। 2014 के आखिर में यादव सिंह को न केवल नोएडा बल्कि ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण का भी इंजीनियरिंग प्रमुख बना दिया गया था। भ्रष्टाचार के मामले पर फरवरी, 2015 में आयकर विभाग ने यादव सिंह के घर पर छापा डाला था। उसके बाद प्राधिकरण ने यादव सिंह को निलंबित कर दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर सीबीआइ ने 30 जुलाई 2015 से मामले की जांच शुरू की थी। तीन फरवरी 2016 को सीबीआइ ने यादव सिंह को गिरफ्तार किया था।

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