दंगाइयों के निशाने पर रहीं जाट, गैर-जाट नेताओं की प्रतिमाएं - Jansatta
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दंगाइयों के निशाने पर रहीं जाट, गैर-जाट नेताओं की प्रतिमाएं

हरियाणा में हाल ही में जाट आंदोलन के दौरान उत्पातियों ने न सिर्फ जीवित लोगों को निशाने पर लिया, बल्कि दिवंगतों को भी नहीं छोड़ा। झज्जर के सेंट्रल चौक में शहीद लेफ्टिनेंट रविंदर छिकारा की संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गई थी।

Author झज्जर (हरियाणा) | March 7, 2016 4:10 AM

हरियाणा में हाल ही में जाट आंदोलन के दौरान उत्पातियों ने न सिर्फ जीवित लोगों को निशाने पर लिया, बल्कि दिवंगतों को भी नहीं छोड़ा।
झज्जर के सेंट्रल चौक में शहीद लेफ्टिनेंट रविंदर छिकारा की संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यह चौक छिकारा चौक के नाम से प्रसिद्ध है। रविंदर छिकारा जम्मू कश्मीर में मुठभेड़ के दौरान कुछ आतंकवादियों को ढेर करने के बाद शहीद हुए थे। उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।
प्रदेश में हाल ही के जाट आंदोलन के दौरान, शहीद रविंदर छिकारा की प्रतिमा को कथित तौर पर गैर जाट लोगों ने तोड़फोड़ दिया। अब प्रतिमा को एक कपड़े में लपेट कर रखा गया है।
सताइस वर्षीय जितेंद्र दहिया कहते हैं- शहीद को सबके होते हैं, इन्होंने उसको भी नहीं छोड़ा। दहिया के हाथ और पैर में फ्रेक्चर है। जाट समुदाय की सर छोटू राम धर्मशाला पर हुए हमले के दौरान उन्हें यह चोट लगी। दंगाइयों ने धर्मशाला को फूंक दिया था और हमले में कई लोग घायल हुए थे।
देश विभाजन के बाद, हरियाणा के बड़े जाट नेताओं में शामिल रहे सर छोटू राम की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचाया गया। सर छोटू राम की प्रतिमा को भी अब कपड़े में लपेट कर रखा गया है। धर्मशाला कमेटी के अध्यक्ष वेदप्रकाश कहते हैं- विभाजन के बाद जो लोग हरियाणा से पाकिस्तान चले गए थे, वे भी सर छोटू राम को श्रद्धा से याद करते हैं। लेकिन हमला करने वाले लोगों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा।
रिपोर्टों के मुताबिक, राव तुलाराम की प्रतिमा को इसी तरह के हमले में नुकसान पहुंचाए जाने के बाद, इन प्रतिमाओं को तोड़ा फोड़ा गया। राव तुलाराम प्रदेश में अहीर समुदाय के बड़े नेताओं में से थे और सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ क्रांतिकारियों में थे। घोड़े पर सवार उनकी प्रतिमा झज्जर में एक प्रमुख क्रासिंग पर लगी है। उन्नीस फरवरी को कुछ उपद्रवियों ने, राव तुलाराम की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया और घोड़े की पूंछ काट डाली।
लेकिन जाट इस घृणित कृत्य में अपनी संलिप्तता से इनकार करते हैं। रिटायर्ड सैनिक सूबेदार जोगिंदर सिंह के मुताबिक, जाटों को बदनाम करने के लिए यह किया गया ताकि अहीर समुदाय के लोगों को एकजुट किया जा सके। सैनी समुदाय के मामन सिहं कहते हैं- जिस तरह से एक दूसरे समुदाय के महापुरुषों की प्रतिमाओं को तोड़ा गया, उससे जाट और गैर जाटों के बीच की खाई साफ है।
वे कहते हैं- सब कुछ दोबारा बन सकता है लेकिन दिल के घाव नहीं।

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