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दिल्ली विवि के नॉर्थ कैम्पस में एबीवीपी ने गेट पर लगवाई सावरकर की प्रतिमा, विपक्ष ने कही यह बात

डीयू के कैम्पस गेट पर एबीवीपी ने सावरकर की प्रतिमा लगाई है जिसके बाद से वहां से विवाद शुरु हो गया। एबीवीपी के इस कदम की कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑल इंडिया (एनएसयूआई) और वामदल सर्मिथत ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) ने आलोचना की है।

Author दिल्ली | Updated: August 21, 2019 12:25 PM
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में लगाई गईं सावरकर, सुभाष चंद्र बोस व भगत सिंह की प्रतिमा। फोटो सोर्स: अभिनव शाह

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव से ठीक पहले एबीवीपी द्वारा कई पुरानी हस्तियों के साथ सावरकर की प्रतिमा लगाने की बात सामने आई है। आरएसएस से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैम्पस स्थित कला संकाय के गेट पर बिना अनुमति वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमा लगाई है। बता दें कि एबीवीपी के इस कदम की कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑल इंडिया (एनएसयूआई) और वामदल सर्मिथत ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) ने आलोचना की है। वहीं इस पर सभी विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह के साथ सावरकर को नहीं रखा जा सकता।

एबीवीपी का आरोप प्रतिमा लगाने की अनुमति नहीं मिलीः एबीवीपी नेतृत्व वाले विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष शक्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति मांगने के लिए संपर्क किया लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। वहीं इस मामले में बयान देते समय सिंह ने कहा, ‘प्रतिमा स्थापित करने की इजाजत के लिए हमने पिछले साल नवंबर में प्रशासन से संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मैंने दोबारा नौ अगस्त को मंजूरी देने का अनुरोध किया लेकिन फिर कोई जवाब नहीं आया। उनकी चुप्पी की वजह से हम यह कदम उठाने को मजबूर हुए हैं।’

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प्रतिमा को लेकर विवाद शुरुः इस मामले में छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि अगर प्रशासन प्रतिमा हटाने की कोशिश करता है तो हम इसका विरोध करेंगे। वहीं एनएसयूआई की दिल्ली ईकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकरा ने एबीवीपी के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा, ‘आप सावरकर को भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के साथ नहीं रख सकते। अगर प्रतिमाएं 24 घंटे के भीतर नहीं हटाई गईं तो हम विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।’ बता दें कि आईसा की दिल्ली ईकाई की अध्यक्ष कवलप्रीत कौर ने भी लाकरा के इस बयान का समर्थन किया।

प्रतिमा को लेकर विपक्ष का तगड़ा वारः वहीं इस मामले में कौर ने कहा, ‘भगत सिंह और सुभाष चंद्र की आड़ में वो सावरकर के विचारों को वैधता देने का प्रयास कर रहे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है। जिस स्थान पर उन्होंने मूर्तियां लगाई हैं वह निजी संपत्ति नहीं है बल्कि सार्वजनिक जमीन है।’ जिस स्थान पर प्रतिमा लगाई गई है वह उत्तर दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। बता दें कि इस पूरे मामले में फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव अगले महीने होने हैं, हालांकि अब तक तारीख का ऐलान नहीं किया गया है।

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