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सीएम शिवराज सिंह चौहान की घोषणा- अनुसूचित जनजाति के प्रत्येक व्यक्ति को 10 रुपए किलो दाल देगी सरकार

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए प्रदेश के जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के लोगों को सस्ती दरों पर दलहनों का वितरण किया जाएगा।

Author भोपाल | December 21, 2017 8:07 PM
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। (File Photo)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के लोगों को 10 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से दलहनों का वितरण किया जाएगा। हालांकि, एक व्यक्ति को महीने में केवल एक किलोग्राम दाल ही इस दर पर दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में चौहान ने कहा, ‘‘कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए प्रदेश के जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के लोगों को सस्ती दरों पर दलहनों का वितरण किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को एक किलोग्राम दाल मात्र दस रुपए में उपलब्ध कराई जाएगी।’’ यह जानकारी जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में दी गई।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कराहल एवं खण्डवा जिले के खालवा विकास खण्ड से शुरू किया जाएगा। चौहान ने कहा कि इस अभिनव कार्यक्रम से दोनों विकासन खण्ड के लगभग 75,000 परिवारों के साढ़े तीन लाख लोग लाभान्वित होंगे। दलहन वितरण का यह महत्वाकांक्षी निर्णय देते समय मुख्यमंत्री चौहान ने संबंधित अधिकारियों को दलहन वितरण की व्यवस्था करने और जनजातीय वर्ग के लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए हैं।

चौहान ने कहा कि जनजातीय लोगों को दलहन उपलब्ध कराने से उनके भोजन में दाल शामिल होगी जिससे उन्हें प्रोटीन की समुचित मात्रा मिलेगी। इससे कुपोषण दूर करने में मदद मिलेगी। बाद में शाम को शिवपुरी जिले के रानौद गांव में चौहान ने एक कार्यक्रम में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर से विशेष पिछड़ी अनुसूचित जनजातियों सहरिया, बैगा और भारिया के परिवारों को कुपोषण से मुक्ति के लिए एक हजार रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी। बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सहरिया, बैगा और भारिया के परिवारों को कुपोषण से मुक्ति के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया था।

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