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गीता ने कहा, मुसलिम परिवार की बेटी नहीं हूं

बहुचर्चित घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान से वर्ष 2015 में भारत लौटी गीता ने बिहार के उस मुसलिम दंपति को पहचानने से साफ इनकार कर दिया जो इस मूक-बधिर युवती को अपनी खोयी बेटी बता रहा है।

Author Published on: December 12, 2017 1:55 AM
गीता ने इशारों में बताया कि वह हिंदू देवताओं-शंकर और हनुमान की पूजा करती है और मुसलिम परिवार से ताल्लुक नहीं रखती है।

बहुचर्चित घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान से वर्ष 2015 में भारत लौटी गीता ने बिहार के उस मुसलिम दंपति को पहचानने से साफ इनकार कर दिया जो इस मूक-बधिर युवती को अपनी खोयी बेटी बता रहा है। उसने इशारों की जुबान में कहा कि वह हिंदू देवी-देवताओं की उपासक है और मुसलिम परिवार से ताल्लुक नहीं रखती। प्रभारी जिलाधिकारी रुचिका चौहान ने बताया कि गीता के माता-पिता की खोज के अभियान के तहत बिहार के सारण जिले के मिर्जापुर गांव निवासी मोहम्मद ईसा, उनकी पत्नी जुलेखा खातून और उनके दो पारिवारिक सदस्यों से मूक-बधिर युवती की मुलाकात कराई गई। उसने इन्हें देखते ही इशारों की जुबान में स्पष्ट तौर पर कहा कि यह उसका परिवार नहीं है।

उन्होंने कहा, गीता ने इशारों में बताया कि वह हिंदू देवताओं-शंकर और हनुमान की पूजा करती है और मुसलिम परिवार से ताल्लुक नहीं रखती है। चौहान ने हालांकि बताया कि संबंधित मुसलिम पति-पत्नी के डीएनए नमूने ले लिए गए हैं। इन्हें गीता की वल्दियत की जांच के लिए दिल्ली की एक प्रयोगशाला भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, अगर गीता किसी दंपति को अपने माता-पिता के रूप में पहचान लेगी, तब भी हम उनके डीएनए नमूने जांच के लिए भेजेंगे। आखिरकार डीएनए टैस्ट से ही तय होगा कि इस युवती पर किसी दंपति का वल्दियत का दावा सही है या नहीं। चौहान ने बताया कि झारखंड के जामताड़ा जिले के सोखा किशकू के किसान परिवार से भी आज गीता की मुलाकात कराई गई। यह परिवार भी गीता को अपनी खोई बेटी बता रहा है।

उन्होंने बताया कि गीता ने किशकू के परिवार को भी पहचानने से इनकार कर दिया। हालांकि, जांच के लिए इस परिवार के डीएनए नमूने भी ले लिए गए हैं। उधर, गीता पर दावा करने वाले मुसलिम परिवार के सदस्यों ने इस मूक-बधिर लड़की द्वारा उसे पहचानने से इनकार किए जाने के बावजूद फिलहाल उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनका कहना है कि गीता इस परिवार की सदस्य रूबेदा है जो वर्ष 1995 में बारात देखने के लिये घर से निकली थी और गुम हो गई थी।
मोहम्मद ईसा के बेटे हिमताज ने कहा, गीता ने मेरे पिता को पहचानने से इनकार कर दिया। लेकिन हो सकता है कि लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के कारण उसकी बचपन की यादें मिट गई हों। हमें उम्मीद है कि डीएनए टैस्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। गीता के खुद को हिंदू बताए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनके गांव की गंगा-जमुनी संस्कृति के कारण उनकी खोई बहन के अवचेतन मन में मंदिरों और हिंदू देवी-देवताओं की पूजा से जुड़ी स्मृतियां दर्ज हो सकती हैं।

हिमताज ने कहा, हमारे घर के आसपास मस्जिद के साथ बहुत सारे मंदिर हैं। वहां हिंदू और मुसलमान एक-दूसरे के पर्व-त्योहार मिलकर मनाते हैं। हम छठ के त्योहार के दौरान हिंदू परिवारों के घर जाते हैं। प्रभारी जिलाधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले के जयस्ािंह कराभरी इथापे के परिवार ने भी कुछ दिन पहले गीता को अपनी बेटी बताया था। लेकिन यह परिवार आज तय कार्यक्रम के बावजूद मूक-बधिर युवती से मुलाकात के लिए नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र का यह परिवार अब इस सिलसिले में असमंजस की स्थिति में है कि गीता उनकी बेटी है या नहीं। शायद इसलिए यह परिवार आज इससे मुलाकात के लिए नहीं पहुंचा।

अब तक देश के अलग-अलग इलाकों के 10 से ज्यादा परिवार गीता को अपनी लापता बेटी बता चुके हैं। लेकिन सरकार की जांच में इनमें से किसी भी परिवार का दावा फिलहाल साबित नहीं हो सका है। गीता गलती से सीमा लांघने के कारण दशक भर पहले पाकिस्तान पहुंच गई थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के विशेष प्रयासों के कारण गीता 26 अक्तूबर 2015 को स्वदेश लौटी थी। इसके अगले ही दिन उसे इंदौर में मूक-बधिरों के लिए चलाई जा रही गैर-सरकारी संस्था के आवासीय परिसर भेज दिया गया था। तब से वह इसी परिसर में रह रही है।

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