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Ayodhya Land Verdict के बाद बाबरी विध्वंस पर भी जल्द आ सकता है फैसला, आडवाणी-उमा समेत 47 BJP नेताओं पर चल रहा क्रिमिनल केस

सीबीआई ने बाबरी मस्जिद को ढहाने के मामले की जांच अपने हाथ में ली थी जिसमें नफरत भरे भाषण देने को लेकर लाल कृष्ण आडवाणी, अशोक सिंघल, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, मुरली मनोहर जोशी, गिरिराज किशोर और विष्णु हरि डालमिया आदि के खिलाफ मामला दर्ज है।

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आरोपी आडवाणी, उमा भारती और अन्य (फोटो सोर्स -इंडियन एक्सप्रेस)

लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत में चल रहे अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने के आपराधिक मामले में फैसला अगले अप्रैल 2020 तक आने की संभावना है। विशेष सीबीआई अदालत ने अभियोजन पक्ष के लिए सबूत और गवाही पेश करने की आखिरी तारीख 24 दिसंबर तय की है। 29 सितंबर 2019 को आरोप तय किए जाने के बाद अदालत के बार-बार आदेश जारी करने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के खिलाफ गवाह नहीं लाने पर हाल ही में अभियोजन पक्ष को फटकार लगाई गई थी। सीबीआई को इस मामले में 47 बीजेपी नेताओं और सैकड़ों अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ आरोप साबित करने हैं।

24 दिसंबर गवाही की अंतिम तारीख पांच अक्टूबर को सत्र अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सभी गवाहों को 24 दिसंबर 2019 तक पेश करना होगा। इस मामले में यह अंतिम तारीख होगी। भाजपा नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ सुनवाई 25 मई, 2017 को लखनऊ की इस विशेष अदालत में शुरू हुई थी, क्योंकि उन्हें इस मामले में बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था।

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राज्यपाल होने से कल्याण सिंह को मिली थी छूट कल्याण सिंह पर राजस्थान के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद सितंबर 2019 में सुनवाई शुरू हुई। राज्यपाल के रूप में उन्हें कानूनी प्रक्रिया से छूट प्राप्त थी। वर्ष 1992 में छह दिसंबर को जब बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तब वह उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री थे। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 से निचली अदालत को दो साल में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने 19 जुलाई 2019 को फिर निर्देश दिया कि मामले में नौ महीने में फैसला सुना दिया जाए।

48 आरोपियों में से कई का हो चुका है निधन सीबीआई ने बाबरी मस्जिद को ढहाने के मामले की जांच अपने हाथ में ली थी जिसमें नफरत भरे भाषण देने को लेकर लाल कृष्ण आडवाणी, अशोक सिंघल, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, मुरली मनोहर जोशी, गिरिराज किशोर और विष्णु हरि डालमिया के खिलाफ मामला दर्ज है। सीबीआई ने बाल साहब ठाकरे, कल्याण सिंह, मोरेश्वर सावे, चंपत राय बंसल, सतीश प्रधान, महंत अवैद्यनाथ, धरमदास, महंत नृत्य गोपाल दास, महामंडलेश्वर जगदीश मुनी, रामविलास वेदांती, वैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास और डॉ. सतीश चंद्र नागर के नाम को जोड़ते हुए 48 व्यक्तियों के खिलाफ पांच अक्टूबर 1993 को समेकित आरोपपत्र दायर किया था। हालांकि इनमें से कई लोगों का निधन हो चुका है।

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