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सृजन घोटाला: सीबीआई की विशेष अदालत ने 6 आरोपियों के खिलाफ जारी किया वारंट

यह वारंट सीबीआई की विशेष अदालत के जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने जारी किया है। यह वारंट सीबीआई के दायर एफआईआर आरसी 17 (ए) 17 के तहत है। जिसमें 13 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल सीबीआई ने किया है।

सृजन घोटाले की सीबीआई जांच कर रही है।

सैकड़ों करोड़ रुपए के सृजन घपले से जुड़े एक मामले में डीडीसी पद पर रहे प्रभात कुमार सिंहा के अलावे बैंक के पांच अधिकारियों के खिलाफ गैर जमानतीय वारंट जारी होने से घोटालेबाजों में सरगर्मी बढ़ गई है। यह वारंट सीबीआई की विशेष अदालत के जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने जारी किया है। यह वारंट सीबीआई के दायर एफआईआर आरसी 17 (ए) 17 के तहत है। जिसमें 13 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल सीबीआई ने किया है। जिनमें सात पहले से इससे जुड़े दूसरे मामले में जेल में बंद है।

जिन डीडीसी प्रभात कुमार और बैंक अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होते ही सीबीआई ने इनकी गिरफ्तारी के लिए अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इससे पहले जारी गिफ्तारी वारंट के आरोपी मनोरमा देवी के बेटे अमित कुमार , इनकी पत्नी प्रिया कुमार और बर्खास्त कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार की पत्नी रेणु गुप्ता सीबीआई गिरफ्त से बाहर है। सीबीआई ने इनपर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। अरुण कुमार जेल में बंद है। वैसे सीबीआई अबतक दर्ज दस मामलों में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक जिनके खिलाफ वारंट जारी हुआ है उनके नाम है प्रभात कुमार सिंहा (पूर्व डीडीसी), अमरेंद्र प्रसाद साहू, संत कुमार सिंहा और नवीन कुमार साह , सुब्रत दास देवशंकर मिश्र है। ये सभी बैंक आफ बड़ौदा, इंडियन बैंक और बैंक आफ इंडिया के वर्तमान व पूर्व अधिकारी है। ध्यान रहे कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति के कर्ताधर्ता , सरकारी अधिकारियों व नाजिर और बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ रुपए का चूना लगाया है। यह अबतक हुई सीबीआई की जांच रिपोर्ट का निचोड़ उसके जरिए दायर आरोपपत्र से सामने आया है। इनमें मुख्य तौर पर दो बैंकों बैंक आफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के कर्मचारी व अधिकारी शामिल है।

सीबीआई के अधिकारियों की एक टीम इस सिलसिले में सन्हौला प्रखंड के पूर्व नाजिर उदयकांत मंडल से पूछताछ की है। ये फिलहाल निर्वाचन दफ्तर में तैनात है। इनसे इनके सबौर प्रोफेसर कालोनी स्थित आवास पर पूछताछ हुई है। इधर डूडा के रिटायर कर्मचारी भीमानंद ठाकुर और नजारत के नाजिर अमरेंद्र यादव के खिलाफ मामला चलाने के वास्ते अभियोजन मंजूरी ज़िलाधीश से मांगी है। डीएम ने इस बाबत सरकारी वकील से राय पूछी है। अमरेंद्र को सीबीआई ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल में ठूंस दिया है। डूडा के रिटायर कार्यपालक अभियंता दारोगा प्रसाद भी सीबीआई के घेरे में है। इन्होंने भी सरकारी राशि की भारी हेराफेरी की है। जानकार बताते है।

दूसरी तरफ, भागलपुर के ज़िलाधीश प्रणब कुमार ने ज़िले के उन महकमा की समीक्षा की है जिनमें सृजन घोटाला हुआ है। साथ ही बिहार महालेखाकार की अंकेक्षण रिपोर्ट का भी अध्ययन किया है। जिनमें घपले की राशि और विभागों के नाम इंगित है । डीएम ने अपने स्तर से एक जांच कमेटी बना काटे गए सरकारी धन के चेक सीधे सृजन के खाते में गए या सम्बंधित खाते में जमा होने के बाद बैंक ने सृजन खाते में ट्रांसफर किया, की जांच करा रहे है। साथ ही यह भी जांच कराई जा रही है कि चेक काटने वाले की नीयत क्या थी। इस तरह पचास से ज्यादा सरकारी जिनमें आईएएस अधिकारी ज़िलाधीश, डीडीसी , डिप्टी कलेक्टर रैंक के, बीडीओ, स्वास्थ्य महकमा के लोग है। जिनके कार्यकाल में घपला सिरे चढ़ा है।

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