ताज़ा खबर
 

बरेली और मुरादाबाद के बीच हुआ प्लेन जैसी सीटों वाली टेल्गो ट्रेन का सफल परीक्षण

स्पेन की टेल्गो ट्रेन का रविवार को बरेली जंक्शन और मुरादाबाद के बीच 115 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चला कर परीक्षण किया गया।

बरेली | May 30, 2016 1:02 AM
सफर के समय में कमी के साथ ही टेल्‍गो के हल्‍के डिब्‍बे 30 प्रतिशत कम ऊर्जा लेते हैं। इससे रेलवे का खर्चा भी कम होगा। टेल्‍गो का दावा है कि उसके कोच मोड़ पर भी तेज रफ्तार से चल सकते हैं। इसके सीटें भी हवाई-जहाज की सीटों जैसी लगती हैं। (Photo: Talgo)

स्पेन की टेल्गो ट्रेन का रविवार को बरेली जंक्शन और मुरादाबाद के बीच 115 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चला कर परीक्षण किया गया। पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जत नगर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि यह परीक्षण सफल रहा है। अब इस ट्रेन का मथुरा, पलवल और दिल्ली, मुुंबई के बीच परीक्षण कराया जाएगा।

एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया कि इस परीक्षण में ट्रेन नौ डिब्बों के साथ दौड़ी। यह ट्रेन सुबह 9:05 बजे बरेली से रवाना हुई और 80-115 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल कर 10:15 बजे मुरादाबाद पहुंची। उन्होंने कहा कि यात्रा का समय घटने के अलावा टाल्गो की हल्की ट्रेनें 30 फीसद कम ऊर्जा की खपत करती हैं। टाल्गो ट्रेन के नौ डिब्बों में दो एक्जीक्यूटिव क्लास की यानें, चार कुर्सी यानें, एक कैफेटेरिया, एक पावर कार और एक डिब्बा कर्मचारियों व उपकरण के लिए शामिल थे।

रेलवे के अनुसंधान डिजाइन व मानक संगठन (आरडीएसओ) के कार्यकारी निदेशक हामिद अख्तर ने कहा कि सफलता या विफलता का आकलन करने से पहले इस तरह के और तीन परीक्षण किए जाएंगे। इस परीक्षण की सफलता या विफलता के बारे में कुछ कहना मुश्किल है। हम समय व अन्य मानकों को दर्ज करेंगे। इन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और तब हम कुछ कहने की स्थिति में होंगे। बरेली जंक्शन और मुरादाबाद के बीच दौड़ी टेल्गो ट्रेन में यात्रियों की जगह हर सीट पर 50 किलो वजन के रेत के बोरे रखे गए थे।

पूर्वोत्तर रेल के महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने बताया कि टेल्गो कोच एल्युमिनियम के बने हुए हैं जिसके कारण इनका वजन भारतीय रेल के कोचों से काफी कम है। इन कोचों के पहियों में हाईड्रोलिक दबाव से संचालित होने वाले डिस्क ब्रेक लगे हैं। ब्रेक लगाए जाने पर ट्रेन पलभर में ही बिना झटके के खड़ी हो जाती है। हादसे के समय इस ट्रेन के डिब्बे एक दूसरे पर नहीं चढ़ते जिसकी वजह से जान माल की हानि कम होती है। इस ट्रेन के नौ कोचों में एक पावर कार, एक पेंट्रीकार, दो एक्जिक्यूटिव क्लास और पांच द्वितीय क्षेणी के कोच है। ट्रेन की कुर्सियों के बीच में काफी जगह दी गई है। एक्जीक्यूटिव क्लास के कोचों में कुर्सियां इस तरह की है कि आप बैठ कर दफ्तर का काम भी कर सकते हैं।

क्जीक्यूटिव क्लास में 24 सीट व द्वितीय क्षेणी में 36 सीटें है। कुल मिला कर पूरी ट्रेन मे 336 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। मनोरंजन के लिए एलइडी टीवी स्क्रीन और सामान रखने के लिए हर कोच में सामान रखने की भी व्यवस्था है। सुरक्षा के लिए पेंट्रीकार में ज्वलनशील गैस के इस्तेमाल की जगह माइक्रोवेव और खाना पकाने की अन्य तकनीक का सहारा लिया जाएगा। जन संपर्क अधिकारी ने सफल परीक्षण के बाद बताया कि अगला परीक्षण मथुरा पलवल के बीच 180 किलोमीटर और दिल्ली मुंबई के बीच 200 किलोमीटर की रफ्तार से किया जाएगा।

Next Stories
1 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूपीए पर परोक्ष निशाना, कहा- देश को गलत राह पर नहीं जाने दूंगा
2 IPL 2016 FINAL: सनराइजर्स हैदराबाद ने 8 रन से जीता आईपीएल-2016, बेंगलुरु के काम नहीं आया गेल का खेल
3 भगत सिंह के पौत्र की सड़क दुर्घटना में मौत
ये पढ़ा क्या?
X