ताज़ा खबर
 

यूपी: अमित शाह के दौरे से पहले सपा-बसपा के बड़े नेता भाजपा में शामिल

भाजपा मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने सपा और बसपा के नेताओं को औपचारिक तौर पर भाजपा की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर उन्‍होंने कहा कि भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

Author नई दिल्ली | April 9, 2018 21:08 pm
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

उत्‍तर प्रदेश में भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश में सत्‍तारूढ़ पार्टी ने सपा-बसपा गठबंधन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सोमवार (9 अप्रैल) को सपा और बसपा के एक-एक पूर्व सांसद, एक पूर्व विधायक, एक पूर्व एमएलसी नगर पालिका परिषदों के अध्‍यक्ष समेत 28 नेताओं ने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। इसके अलावा पूर्व में चुनाव लड़ चुके कई नेताओं ने भी बीजेपी की सदस्‍यता ग्रहण कर ली। बता दें कि सपा-बसपा गठजोड़ से उत्‍तर प्रदेश का राजनीतिक समीकरण अचानक से बदल गया है। इसके अलावा भाजपा के कई दलित सांसदों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसे देखते हुए पार्टी ने अपनी रणनीति बदल दी है। भाजपा ने अब दूसरे दलों के प्रमुख दलित और पिछड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के लिए अभियान शुरू कर दिया है।

भाजपा मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने सपा और बसपा के नेताओं को औपचारिक तौर पर भाजपा की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर उन्‍होंने कहा कि भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग पार्टी में शामिल हो रहे हैं। बीजेपी के राज्‍य प्रमुख ने मिश्रिख के पूर्व बसपा सांसद अशोक रावत, सपा के पूर्व सांसद जयप्रकाश रावत, डुमरियागंज के पूर्व विधायक प्रेमप्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी, पूर्व एमएलसी हीरा ठाकुर, कुशीनगर के तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र से पूर्व बसपा प्रत्याशी विजय राय, उन्नाव में पूर्व बसपा प्रत्याशी पंकज त्रिपाठी आदि को पार्टी की सदस्‍यता दिलाई। भाजपा ने पूर्व सांसद जयप्रकाश रावत, अशोक रावत तथा पूर्व एमएलसी हीरा ठाकुर जैसे नेताओं के जरिए दलित और पिछड़ा समीकरण को मजबूत करने की कोशिश की है।

वर्ष 1991 और 1996 में दो बार हरदोई में भाजपा से सांसद रहे जयप्रकाश रावत 1998 में चुनाव हारने के बाद लोकतांत्रिक कांग्रेस से 1999 में चुनाव लड़े और फिर जीत गए। 2004 में जयप्रकाश सपा में शामिल हो गए और लखनऊ की मोहनलालगंज से लड़े और जीते। लेकिन, 2009 में चुनाव हार गए थे। वर्ष 2014 में वह फिर सपा से मिश्रिख क्षेत्र से चुनाव लड़े और हार गए। बता दें कि सपा और बसपा के बीच नए समीकरण बनने के बाद भाजपा को फूलपुर और गोरखपुर में हाल में हुए लोकसभा उपचुनावों में अप्रत्‍याशित हार का सामना करना पड़ा था। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने अपनी रणनीति अभी से बनानी शुरू कर दी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App