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मोदी सरकार के ‘हिंदी प्लान’ पर विरोध में उतरा दक्षिण भारत, केंद्रीय मंत्री बोले- सिर्फ गलतफहमी है, फाइनल कुछ नहीं

तीन भाषा फॉर्मूला सरकार के लिए अभी से मुश्किल होता दिख रहा है। इसके विरोध में पूरा दक्षिणी भारत सामने आया है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा कि छोटी कक्षा से कक्षा 12 तक हिंदी को लागू करना, एक बड़ा झटका है। ऐसी सिफारिशें देश को 'विभाजित' कर देंगी।

Author नई दिल्ली | June 2, 2019 4:02 PM
प्रकाश जावड़ेकर (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी पढ़ाए जाने के विचार को लेकर उठा विवाद अब तेज हो गया है। दक्षिण भारतीय राज्यों में इसका विरोध बढ़ता जा रहा है। इसी बीच रविवार (02 मई) को मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुके वर्तमान केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार की तरफ से स्पष्टीकरण दिया। गैर-हिंदी भाषी राज्यों के कुछ लोगों ने सरकार के इस विचार पर विरोध जताया है। उन लोगों का कहना है कि सरकार ऐसा करके उन पर हिंदी थोप रही है। इस मामले में गैर-हिंदी भाषी राज्यों के कई नेताओं और अभिनेताओं ने भी ऐतराज जताया।

तीन भाषा का फॉर्मूला मानने से इनकारः तमिलनाडु और अन्य गैर-हिंदी भाषी राज्यों में केवल स्थानीय भाषा और अंग्रेजी ही स्कूलों में पढ़ाई जाती है। ऐसे में सरकार इन राज्यों में तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने की सोच रही है। इसके अनुसार अन्य भाषाओं के साथ-साथ हिंदी भी स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल की जाएगी। इसके लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई थी जिसने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है, लेकिन दक्षिण भारत के कई राज्यों ने इसका विरोध किया है और इसे मानने से इनकार भी किया है।

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अपने भी हुए खिलाफः मोदी सरकार के इस विचार पर डीएमके और सीपीआई के साथ-साथ बीजेपी की सहयोगी पीएमके ने भी विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा, ‘सरकार को अभी ड्राफ्ट मिला है, इस मामले में कोई कानून बनाया नहीं है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अभी केवल ड्राफ्ट तैयार हुआ है। सरकार ने कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया है। यह सिर्फ एक गलतफहमी है। ड्राफ्ट पर प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही हम कोई निर्णय लेंगे।’

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‘तीन भाषा फॉर्मूला विविधता के लिए खतरा’: तीन भाषा फॉर्मूला सरकार के लिए अभी से मुश्किल होता दिख रहा है। इसके विरोध में पूरा दक्षिणी भारत सामने आया है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा कि छोटी कक्षा से कक्षा 12 तक हिंदी को लागू करना, एक बड़ा झटका है। ऐसी सिफारिशें देश को ‘विभाजित’ कर देंगी। तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री केए सेनगोट्टैयन ने एक तमिल समाचार चैनल से बात करते हुए कहा, ‘तमिलनाडु में जो वर्तमान दो-भाषा फॉर्मूला चल रहा है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। हमारे राज्य में केवल तमिल और अंग्रेजी ही पढ़ाई जाएगी।’ एएमएमके नेता टीटीवी दिनाकरन ने कहा, ‘गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी को लागू करने से विविधता नष्ट हो जाएगी। इससे गैर-हिंदी भाषी दूसरे दर्जे के नागरिक बन कर रह जाएंगे।’

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