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आसान नहीं दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट का चुनावी दंगल

2008 के पहले यह सीट देश के सबसे संपन्न लोगों की सीट मानी जाती थी लेकिन अब यह सीट काफी बड़ी हो गई है। इस सीट पर 20,65,755 मतदाता हैं। पिछले चुनाव में भाजपा के रमेश बिधूड़ी ने आप के देवेन्द्र सहरावत को 10,7000 मतों से पराजित किया था।

दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट के सांसद और भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी की दबंग छवि को आम आदमी पार्टी (आप)और कांग्रेस के उम्मीदवार गुंडई बताते हैं।

दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट के चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दे प्रभावी लग रहे हैं। इस सीट के सांसद और भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी की दबंग छवि को आम आदमी पार्टी (आप)और कांग्रेस के उम्मीदवार गुंडई बताते हैं। बिधूड़ी का दावा है कि वे कई काम इसलिए नहीं करा पाए हैं क्योंकि दिल्ली की आप सरकार ने उन्हें कोई सहयोग नहीं दिया। वहीं ‘आप’ के उम्मीदवार राघव चड्ढा का आरोप है कि सालों इलाके में कोई काम नहीं हुआ, दिल्ली में आप की सरकार बनने के बाद ही घर-घर पानी पहुंचाया गया और अनेक विकास कार्य करवाए गए। भाजपा सांसद के खराब व्यवहार के चलते इलाके के लोग उनके पास जाने से कतराते हैं। आखिरी क्षण में कांग्रेस के उम्मीदवार बने बॉक्सर विजेन्द्र सिंह भी भाजपा सांसद पर लोगों से सही व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाते हैं लेकिन वे आप उम्मीदवार राघव चड्ढा को बच्चा उम्मीदवार मानते हैं। चुनाव प्रचार के दूसरे दौर में गर्मी बढ़ने के बावजूद चुनाव प्रचार में तेजी आई है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एक जनसभा में बोल चुके हैं कि आप नेता अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी राहुल चड्ढा का चुनाव केजरीवाल के लिए भी प्रतिष्ठा का चुनाव है। वे चुनाव प्रचार शुरू होने से काफी पहले से चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

2008 के पहले यह सीट देश के सबसे संपन्न लोगों की सीट मानी जाती थी लेकिन अब यह सीट काफी बड़ी हो गई है। इस सीट पर 20,65,755 मतदाता हैं। पिछले चुनाव में भाजपा के रमेश बिधूड़ी ने आप के देवेन्द्र सहरावत को 10,7000 मतों से पराजित किया था। देवेन्द्र सहरावत अब आप से बगावत कर चुके हैं। कांग्रेस के 2009 के इस सीट से सांसद रमेश कुमार को 1,25, 213 मत मिल पाए। इस लोकसभा सीट के नीचे विजवासन, पालम, महरौली, छतरपुर, देवली, अंबेडकर नगर, संगम विहार, कालका जी, तुगलकाबाद और बदरपुर में से केवल कालका जी ही पहले के दक्षिणी दिल्ली सीट का इलाका था। बाकी नौ सीटें पहले के बाहरी दिल्ली सीट में थी। इन दसों सीटों पर आप के विधायक काबिज है। विजवासन के विधायक सहरावत नाम के लिए ही आप में हैं। वहीं 39 निगम सीटों में से 27 भाजपा के पास हैं। इस सीट पर दलित 19 फीसद, ब्राह्मण 9 फीसद, गुर्जर 9 फीसद, जाट 6 फीसद और अन्य पिछड़ा वर्ग 15 फीसद है। मुसलिम आबादी तो पांच फीसद है लेकिन पूर्वांचल के प्रवासियों की तादात 20 फीसद से ज्यादा है। कुतुबमीनार, तुगलकाबाद किला,रंगपुरी पहाड़ी पर सुल्तान गौरी का मकबरा,महरौली में हर साल सांप्रदायिक सौहार्द लिए मनाए जाने वाला फूल वालों की सैर,छतरपुर मंदिर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय,आइआइटी से लेकर पूरे इलाके में 54 गांव और हर गांव का एतिहासिक महत्त्व होने के साथ दिल्ली के कई राजाओं की राजधानी इस इलाके में रही है।

इस सीट से सुषमा स्वराज्य, मदन लाल खुरान दो-दो बार और विजय कुमार मल्होत्रा तीन बार सांसद रहे, मल्होत्रा तीन बार पराजित भी हुए, इस सीट को पहले जनसंघ और बाद में भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। 1984 के चुनाव में जीते कांग्रेस के ललित माकन की सिंख आतंकवादियों ने हत्या कर दी। उस सीट से 1985 में हुए उप चुनाव में अर्जुन सिंह चुनाव जीते और पहली बार कांग्रेस की परंपरा से हट कर पार्टी के उपाध्यक्ष बने। इस बार कांग्रेस ने पहले टिकट 2009 के सांसद रमेश कुमार को दिया। वे पूर्व सांसद सज्जन कुमार के भाई हैं जिन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के चलते सजा मिली हुई है। एक बार फिर से सिख विरोधी दंगा को मुद्दा बनाए जाने के डर से कांग्रेस ने नामांकन भरे जाने के आखिरी दिन बॉक्सर विजेन्द्र सिंह को उम्मीदवार बनाया। अनाधिकृत निमार्ण के कारण एतिहासिक तुगलकाबाद किला के वजूद पर ही सवाल उठने लगे हैं।

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