जर्मनी के नागरिक जोड़े ने अपने पिता की यादें और परिवार के कहने पर पंजाब के मोहाली में आकर शादी की। बीते शनिवार, मोहाली के एक गुरुद्वारे में 42 साल के रॉबिन सिंह के साथ जर्मनी की 30 वर्षीय पिया ब्लैंकरमैन ने “लावन फेरे” (श्री गुरु ग्रंथ साहिब के चारों ओर चक्कर लगाने की शादी की रस्म) लिए। रॉबिन के पिता पंजाबी थे और मां जर्मन हैं।

रॉबिन अपने दिवंगत पिता की पंजाबी जड़ों का सम्मान करने के लिए जर्मनी से 6,000 किलोमीटर दूर भारत आए और गुरुद्वारे में शादी की। और सिर्फ दूल्हा-दुल्हन ही नहीं, बल्कि रॉबिन की जर्मनी नागरिक माँ, बहन, जीजा और दोस्त भी इस पाँच दिन की यात्रा में उनके साथ शामिल हुए। भारत में शादी करने के अपनी बेटी के फैसले का स्वागत करते हुए, पिया की माँ, भाई और कुछ दोस्त भी उनके साथ आए।

रॉबिन को सिख होने पर गर्व

रॉबिन ने कहा कि उन्हें हमेशा अपनी सिख होने पर गर्व रहा है। शादी के एक दिन बाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जर्मनी में मैं पगड़ी नहीं पहनता, लेकिन मैंने हमेशा खुलकर बताया है कि मेरे पिता सिख हैं। मुझे हमेशा से हाफ सिख होने पर बहुत गर्व रहा है।”

पंजाब में शादी करने के फैसले की कहानी

जब इस परिवार से पूछा गया कि आप लोगों ने शादी पंजाब में क्यों करने की सोची, तो उन्होंने चार दशक पुरानी एक अधूरी इच्छा के बारे में बताया। 1980 के दशक की शुरुआत में, रॉबिन के पिता जगतार सिंह टौर, हजारों सिख प्रवासियों की तरह रोजगार की तलाश में जर्मनी गए थे। तीन साल बाद, जगतार ने एक जर्मन महिला एनेग्रेट रोलेके-सिंह से शादी की। वे शादी के लिए भारत नहीं आ पाए और जर्मनी में ही कोर्ट मैरिज की। इस जोड़े के दो बच्चे थे रॉबिन और उसकी छोटी बहन जेनी। वे जर्मनी में पले-बढ़े, लेकिन छुट्टियों में अपने दादा-दादी के साथ समय बिताने के लिए पंजाब आते रहते थे।

जगतार के माता-पिता, डॉ. बलबीर सिंह टौर और जसवंत कौर बंटवारे के बाद पाकिस्तान से पंजाब आए थे और उनका परिवार टोहाना (जो अब हरियाणा में है) के पास चंदरकला गाँव में बस गया था। बाद में, जब जगतार ने अपने माता-पिता के लिए एक नया घर बनवाया, तो परिवार मोहाली चला गया।

रॉबिन ने कहा, “किसी ने मुझ पर जबरदस्ती नहीं की, कोई दबाव नहीं था, लेकिन मेरे पिता ने जर्मनी में मेरी माँ से शादी की थी, मेरे दादा-दादी (जो अब इस दुनिया में नहीं हैं) को पंजाब में हमारे परिवार की किसी शादी को देखने का मौका कभी नहीं मिला। मुझे लगा कि अपने परिवार के लिए मैं कम से कम इतना तो कर ही सकता हूँ।”

रॉबिन की चार बुआ शादी से खुश

रॉबिन ने आगे बताया कि उनके पिता और उनके छोटे भाई का निधन हो चुका है, लेकिन जब उन्होंने अपनी शादी की योजना के बारे में बताया तो उनकी चारों बहनें बहुत खुश हुईं। रॉबिन ने अपने हाथों पर मेहंदी से लिखा पिया का नाम दिखाते हुए कहा, “जब मैंने अपनी बुआओं को पंजाब में शादी करने के अपने फैसले के बारे में बताया तो वे बहुत खुश हुईं। मैंने हमेशा उनसे कहा था कि मैं यह वादा तो नहीं कर सकता कि मैं किसी भारतीय महिला से ही शादी करूँगा, लेकिन शादी पंजाब में ही होगी।”

रॉबिन के पिता की कैसे शुरू हुई लव स्टोरी?

रॉबिन की मां, 69 वर्षीय एनेग्रेट रोलेके-सिंह ने कहा कि यह एक डेजा वु (फ्रेंच फ्रेज इसका मतलब कि मैने पहले देखा है) था। पहली बार वह अपने ससुरालवालों से मिलने के लिए चार दशक पहले भारत आई थी, उसकी गोद में छोटा रॉबिन था। तब से, कई बार आईं, लेकिन यह स्पेशल थी। एनेग्रेट रोलेके-सिंह ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि पिया समझ गई कि रॉबिन पंजाब में शादी क्यों करना चाहता था। उसने अपने पिता के लिए उसकी भावनाओं को समझा और उनके वादे का सम्मान किया।” एनेग्रेट ज्यादातर जर्मन बोलती है लेकिन पंजाबी समझती है।

जगतार के साथ अपनी लव स्टोरी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं एक नर्स थी और वह एक स्टील कंपनी में काम करते थे। उनके सादे स्वभाव ने मेरा दिल जीत लिया। उन्होंने मुझसे शादी करने के लिए मुझे मनाने की बहुत कोशिशें कीं। हमारी शादी 1983 में हुई। फिर हमने अपनी नौकरियां छोड़ दीं और 1994 में वुपरताल में कपड़ों की एक दुकान शुरू की। हमने हमेशा एक-दूसरे के कल्चर और पारिवारिक बैकग्राउंड का सम्मान किया।”

पंजाबी खाना बनाना सीखा

एनेग्रेट ने कहा, “जगतार मुझे सिख धर्म के मूल्यों और कल्चर के बारे में बताते रहते थे, और जितना अधिक मैंने इसके बारे में जाना, उतना ही मेरा सम्मान बढ़ता गया। शुरू में, हमारे दोनों परिवारों को थोड़ा शक था, लेकिन शादी के बाद उन्होंने हमें अपना लिया। जब भी हम जर्मनी में किसी गुरुद्वारे जाते, तो मैं पंजाबी सूट पहनती थी। मैंने पंजाबी खाना बनाना भी सीखा क्योंकि मेरे पति को यह बहुत पसंद था। दाल मखनी, आलू गोभी, साग मैं ये सब बना सकती हूँ। मैं पंजाबी में कहती हूँ, की हाल है.. रोटी खा लो।”

उन्होंने कहा, “मैं पहली बार अपने ससुरालवालों से मिलने भारत तब गई थी जब रॉबिन जन्म हो चुका था, यानी 1985 के आसपास। मेरे सास-ससुर ने मुझे इतना प्यार और आशीर्वाद दिया कि मुझे कभी भी किसी पंजाबी से शादी करने का पछतावा नहीं हुआ। जब भी मैं भारत जाती थी, मेरे ससुर शगुन के तौर पर सोने का कोई गहना जरूर खरीदते थे।”

शादी में एनेग्रेट, उनकी बेटी जेनी, पिया, उनकी माँ रेजिना और पिया की दो सहेलियों ने पारंपरिक पंजाबी सूट पहने और पंजाबी लोक गीतों पर गाना-बजाना और डांस किया। पिया को पंजाबी समझ नहीं आती। उन्होंने कहा, “जब भी कोई पंजाबी गाना बजता और सब हँसते-गाते और नाचते, तो मैं भी हँसती। उन्होंने हमें घर जैसा महसूस कराने के लिए जर्मन संगीत भी बजाया, और यह सच में बहुत अच्छा लगा।”

रॉबिन ने पिया को कैसे मनाया?

पिया एक सोशल वर्कर हैं और रॉबिन बास्केटबॉल कोच हैं। उन्होंने लगभग तीन साल पहले शादी करने का फैसला किया था। उन्होंने कहा, “जब उन्होंने मुझे बताया कि वे भारत में शादी करना चाहते हैं, तो मैंने उनकी भावनाओं का सम्मान किया। मुझे बस इस बात की चिंता थी कि भारतीय शादियाँ बहुत बड़ी होती हैं और दुल्हन ही सबका ध्यान खींचती है। मैं किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाना चाहती थी। जब सब कुछ ठीक-ठाक हो गया, तो मुझे राहत मिली।”

रॉबिन ने बताया कि उन्होंने पिया को शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार करने के लिए यूट्यूब वीडियो दिखाए। उन्होंने कहा, “हमें उसे भारी-भरकम कपड़ों, तेज संगीत, डांस वगैरह के लिए मानसिक रूप से तैयार करने के लिए कुछ यूट्यूब वीडियो दिखाने पड़े। भारत में शादी होने को लेकर किसी को कोई परेशानी नहीं थी। बस लॉजिस्टिक्स, इंतजाम और यात्रा वगैरह की चिंता थी। लेकिन भारत में मेरे परिवार ने सब कुछ प्लान किया और इसे मुमकिन कर दिखाया।”

रॉबिन के ममेरे भाई नवतेज सिंह ने कहा कि परिवार ने अपनी दोनों जर्मन बहुओं को पूरे दिल से अपनाया है। उन्होंने कहा, “रॉबिन की माँ हमेशा हमारी मामी जी ही रहीं। हमने उन्हें कभी जर्मन या भारतीय के तौर पर नहीं देखा। हम चाहते थे कि रॉबिन को एक अच्छा साथी मिले, और पिया को देखकर हमें पता है कि उसे वह मिल गई है।” राबिन और पिया जर्मनी में भी जश्न मनाएंगे।

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दिल्ली में नीट और झारखंड में JPSC पेपर लीक विवाद के बीच पंजाब में भी कथित पेपर लीक का मामला काफी गर्माया था। दरअसल, 19 जुलाई को पंजाब में हुई फार्मासिस्ट ऑफिसर्स की भर्ती परीक्षा के पेपर लीक को लेकर पंजाब में सियासी घमासान काफी दिनों से चल रहा था। इस घमासान के बीच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को यह माना कि पेपर लीक हुआ था और हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट 17 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें