बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों ने मीम, रील्स और एआइ के सहारे सोशल मीडिया पर प्रचार तेज कर दिया है। सभी पार्टियां कार्टून, छोटे वीडियो के जरिए अपने वादे और किए गए काम को लोगों तक पहुंचा रहा है। साथ ही इन वीडियो में विपक्षी पार्टी के विवादित बयान, उनके नेताओं के धमकी व दूसरे भावनात्मक सामग्री का प्रसार कर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं की माने तो सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रही सामग्री ज्यादा असरदार है। यह सीधे तौर पर युवाओं के साथ हर वर्ग की महिला व पुरुष को प्रभावित करते हैं। यहीं कारण है कि इन पर सामग्री डालने से पहले उसके असर का मूल्यांकन किया जा रहा है। यह चुनाव के लिए प्रचार बंद होने के बाद भी प्रभावी रहेंगी। जिन्हें जरूरत के आधार पर “बूस्ट” किया जा सकेगा। पार्टियां विरोधियों को घेरने के लिए व्यंग्यात्मक मीम का सहारा ले रही हैं, जिसमें पुराने बयानों, विवादों और राजनीतिक फैसलों को मजाकिया अंदाज में पेश किया जा रहा है।
तमिलनाडु में फिल्मों और पाप कल्चर से जुड़े संवाद को राजनीतिक संदेश के साथ जोड़कर युवाओं को आकर्षित किया जा रहा है। साथ ही गरीब बनाम अमीर, स्थानीय बनाम बाहरी जैसे मुद्दों पर छोटे वीडियो भी सीधे मतदाताओं तक पहुंचाकर भावनाओं को छूने की कोशिश की जा रही है। वहीं कई जगहों पर अपने नेताओं को हीरो और विरोधियों को विलेन की तरह पेश करने वाले पोस्टर और वीडियो भी वायरल हो रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में युवाओं को लुभाने के लिए तृणमूल कांग्रेस सांसद सायानी घोष के वीडियो को वायरल कर रही हैं। इसमें सांसद अनोखे अंदाज में भाजपा और उनके बड़े नेताओं पर निशाना साधने के साथ खिल्ली उड़ाते हुए दिख रही हैं। वहीं पार्टी ने ममता बनर्ती, अभिषेक बनर्जी के साथ दूसरे बड़े नेताओं के चुनावी सभाओं में बोले गए बयानों का छोटे वीडियो को भी प्रसारित किया है। साथ ही भाजपा नेताओं के विवादित बयान और केंद्रीय बलों के द्वारा मारपीट की घटनाओं को भी चुनाव प्रभावित करने से जोड़कर दिखाया है।
वहीं भाजपा दोनों राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा दूसरे बड़े नेताओं के चुनावी सभाओं के बयान को दिखा रही है। साथ ही कार्टून के माध्यम से बताया है कि कैसे केंद्र सरकार की योजनाओं से किसान से लेकर हर वर्ग तक सीधी सहायता पहुंच रही है।
वहीं तमिलनाडु में द्रमुक पार्टी स्टालिन के कार्टून वीडियो के साथ छोटे वीडियो को प्रसारित कर रही हैं जिसमें मुख्यमंत्री गरीब और मध्यम लोगों की मदद करते हुए दिख रहे हैं। इसके अलावा उन्हें एक अभिनेता की तरह प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा पार्टी भाजपा नेताओं के बयान को ज्यादा प्रसारित कर रही है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में भाजपा को लोग पसंद नहीं करते। इनके साथ आने से अन्नाद्रमुक भी कमजोर होगा। वहीं संसद में काली साड़ी में परिसीमन को लेकर कनिमोझी के बयान को दिखते हुए बताया है कि भाजपा संविधान को खत्म करना चाहती है। वहीं अन्नाद्रमुक पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के वीडियो के साथ स्थानीय नेताओं के वीडियो को उठा रही है। साथ ही द्रमुक सरकार के तरफ से राज्य में देर से शुरू किए गए पेंशन योजना सहित अन्य योजनाओं पर सवाल उठा रही है।
वहीं कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में ममता सरकार पर सवाल उठाते हुए कई वीडियो प्रसारित किए हैं। इसमें बताया है कि राज्य में बड़े संस्थान सहित दूसरी सुविधाएं कांग्रेस सरकार की देन हैं। इसके अलावा दावा किया है कि राज्य में सरकार बनने पर किसान के हितों में काम करेगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य की सुविधाओं का विस्तार करेंगे।
यह भी पढ़ें: स्क्रीन की साजिश या लत की कहानी, बच्चों को क्यों जकड़ रहा है सोशल मीडिया का जाल | संपादकीय
इसमें दो राय नहीं कि सोशल मीडिया के आने से सूचना का प्रवाह तेज हुआ है, सार्वजनिक अभिव्यक्ति के नए अवसर खुले हैं और रचनात्मकता के प्रदर्शन को भी नया मंच मिला है। मगर सतर्कता और सावधानी न बरती जाए, तो कई बार तकनीक की सुविधा भी असुविधा बन जाती है। सोशल मीडिया को लेकर भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। खासकर बच्चों और किशोरों पर इसका नकारात्मक प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहा है। अभी तक माना जा रहा था कि बच्चों का सोशल मीडिया पर बेरोक-टोक ज्यादा समय बिताने से वे इसके आदी हो रहे हैं, जिसका न केवल उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी पैदा हो रही हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
