ताज़ा खबर
 

स्‍मार्ट स‍िटी: 130 से बढ़ा 202 करोड़ का कर द‍िया ठेका, भड़के कम‍िश्‍नर ने क‍िया रद्द, सीएफओ पर लगाया जुर्माना

डिवीजन के आयुक्त राजेश कुमार और बिहार प्रशासनिक अधिकारियों के बीच टकराव का शोर अभी थमा भी नहीं है कि दूसरी ओर स्मार्ट सिटी के आईएएस सीईओ श्याम बिहारी मीणा से टकराव की नौबत आ गई।

Author भागलपुर | January 14, 2019 6:21 PM
बाएं तरफ आयुक्त नगर राजेश कुमार और दाईं ओर नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा।

डिवीजन के आयुक्त राजेश कुमार और बिहार प्रशासनिक अधिकारियों के बीच टकराव का शोर अभी थमा भी नहीं है कि दूसरी ओर स्मार्ट सिटी के आईएएस सीईओ श्याम बिहारी मीणा से टकराव की नौबत आ गई। ये भागलपुर नगर निगम के आयुक्त भी हैं। नतीजतन घोषणा के तीन साल बाद भी भागलपुर स्मार्ट सिटी का काम सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। दरअसल, स्मार्ट सिटी निदेशक मंडल के अध्यक्ष आयुक्त हैं और इनकी अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर की निविदा को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही ठेके के तमाम कागजात जांच कराने की सिफारिश के साथ सरकार को पटना भेज दिया है। बता दें कि यह ठेका 130 करोड़ रुपए का होना था लेकिन सीईओ ने इजाफा कर 202 करोड़ रुपए का कर दिया। इसी मामले को लेकर निदेशक मंडल ने आपत्ति जताई है। ऐसे में अब फिर से इसका प्राक्कलन बनेगा,  जिसका मूल्यांकन आईआईटी पटना कर मुहर लगाएगी। तब जाकर दोबारा ठेका निकलेगा।

इसके अलावा निदेशक मंडल ने स्मार्ट सिटी के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) हिमांशु ठाकुर से पचास हजार रुपए दंड के तौर पर वसूलने का आदेश दिया है। आईटी सेल के जसीम मंडल को नौकरी से फौरन हटाने का भी हुक्म दिया है। इतना ही नहीं आयुक्त का यह भी कहना है, कि नगर निगम के आयुक्त को ही सीईओ बनाने का नियम स्मार्ट सिटी नियमावली में दर्ज है। वरना इन्हें भी सीईओ के पद से हटा दिया जाता। ठेके की रकम में इजाफा पाने के लिए मनमाने तरीके से की गई है जिसके चलते इस मामले की जांच होगी।

मामले को  लेकर नगर आयुक्त श्यामबिहारी मीणा ने आनन फानन में छुट्टी के दिन रविवार देर शाम प्रेस कांफ्रेंस अपने दफ्तर में बुलाई और इनके मातहत पर की गई कार्रवाई व ठेके पर सवाल उठकर रद्द करने पर अपनी नाराजगी जाहिर की। इनका कहना है कि ठेके की संचिका को बगैर जांचे पढ़े रद्द कर देना ठीक नहीं है। टेंडर कई प्रक्रिया से गुजरने के बाद तैयार कर सार्वजनिक किया गया। उम्दा और बढ़िया काम कराने के लिए ठेके की रकम में बढ़ोतरी की गई। मगर वे इसका जबाव साफ साफ नहीं दे सके कि 130 करोड़ से 202 करोड़ रुपए मसलन 56 फीसदी इजाफा कैसे हुआ।

नगर आयुक्त ने साफ तौर पर कहा कि मेरी कार्य शैली और क्षमता पर बड़े अधिकारियों को तनिक भी संशय है तो यह काम ज़िलाधीश से करा सकते हैं। उनके पास जरूरत के मुताबिक कर्मचारी व अधिकारी भी उपलब्ध हैं वाबजूद इसके उन्होंने हाथ खड़े कर दिए हैं। वे बोले कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कोई बड़ा काम स्मार्ट सिटी के तहत नहीं हो पाएगा।

उन्होंने अपने को ईमानदार साबित करने के वास्ते स्मार्ट सिटी का हिसाब भी पत्रकारों के सामने पेश किया और बोले कि अबतक 382 करोड़ रुपए इस मद में सरकार से मिले हैं, जिसमें से ग्यारह करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इनके कार्यकाल के दौरान केवल एक करोड़ खर्च किया गया। दो चेक के जरिए बैंक से साठ लाख रुपए पीडीएमसी को दिए और 40 लाख रुपए सेनिटेशन पर खर्च हुए हैं, जिन्हें भी ब्योरा चाहिए वे आरटीआई के जरिए मांग सकता है।

बता दें कि शुक्रवार और शनिवार को बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने अपनी बांहों पर काला बिल्ला लगा आयुक्त पर भयादोहन रवैए का आरोप लगा विरोध जताया था। उनकी बैठकों का भी इन अधिकारियों ने बाकयदा संघ की बैठक बुला बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया है।  साथ ही सरकार से इनके तबादले की मांग की है। यह आंदोलन अभी थमा नहीं है। अब आईएएस नगर आयुक्त से टकराव की नौबत है। मगर आयुक्त को इनसब की कोई परवाह नहीं है।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X