इंजीनियरिंग कॉलेज BITS पिलानी के गोवा कैंपस में पिछले 15 महीनों में छह छात्रों की मौत की खबर ने सबको झकझोर दिया है। पुलिस की जांच के अनुसार, इनमें से कम से कम तीन मौतों के पीछे पढ़ाई का दबाव मुख्य वजह माना जा रहा है। वहीं एक मौत व्यक्तिगत कारणों से और एक मौत अभी भी जांच के अधीन है।

जैसा कि गोवा के होम डिपार्टमेंट ने विधानसभा सत्र में बताया, 2024 और 2025 में कैंपस में पांच असामान्य मौतें हुईं। इनमें से चार छात्राओं और छात्रों ने आत्महत्या की, एक मौत प्राकृतिक कारण से हुई और एक केस की वजह अभी तय नहीं हो पाई है। खास बात यह है कि सभी पांच मौतें परीक्षा के समय हुई थीं।

पहली मौत 10 दिसंबर 2024 को 20 साल के छात्र की हुई थी

पहली मौत 10 दिसंबर 2024 को हुई। 20 साल का छात्र, जो यूपी का रहने वाला था और एमएससी फिजिक्स के साथ बीई कंप्यूटर साइंस कर रहा था, उसने अपने हॉस्टल रूम में आत्महत्या कर ली। पुलिस की जांच में पाया गया कि इस मामले में किसी भी तरह की हत्या या अन्य संदिग्ध गतिविधि नहीं थी। यह मौत मुख्य रूप से पढ़ाई का तनाव, रिश्तों की परेशानी और माता-पिता की उम्मीदों के कारण हुई।

दूसरी मौत 5 मार्च 2025 को हुई। गोवा का रहने वाला 20 साल का छात्र हॉस्टल में मृत पाया गया। पुलिस ने कहा कि इसका कारण पढ़ाई और प्रदर्शन के तनाव से जुड़ा था। छात्र लगातार यह महसूस कर रहा था कि उसकी मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे और इसी कारण उसे निराशा और चिंता महसूस हो रही थी।

तीसरी मौत 1 मई 2025 को हुई। यूपी का 20 साल का छात्र, जो इकोनॉमिक्स और कंप्यूटर साइंस पढ़ रहा था, उसने भी आत्महत्या कर ली। पुलिस फाइल में माता-पिता के पत्र के अनुसार, छात्र का शैक्षणिक प्रदर्शन पहले से ही कमजोर हो रहा था। इस मामले में भी कोई बाहरी दबाव नहीं मिला, लेकिन जांच अभी जारी है।

16 अगस्त 2025 को एक और 20 साल का यूपी का छात्र हॉस्टल में बेहोश मिला और बाद में उसकी मौत हो गई। मेडिकल रिपोर्ट में यह मौत प्राकृतिक कारणों से हुई बताई गई है। 4 सितंबर 2025 को कर्नाटक का 19 साल का छात्र आत्महत्या कर गया। पुलिस के अनुसार, छात्र किसी व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी समस्या से गुजर रहा था। इस मामले में भी जांच जारी है।

इन घटनाओं के बाद गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जिला स्तर की एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की। कमेटी ने तीन बैठकें की और पाया कि “सुसाइड कॉन्टैजियन” यानी आत्महत्या की एक खबर या घटना दूसरों को प्रभावित कर सकती है, जिससे अन्य छात्रों में भी तनाव और चिंता बढ़ती है। इस साल फरवरी में एक और छात्र की मौत हुई, जो जांच के अधीन है। कॉलेज प्रशासन ने बताया कि छात्र व्यक्तिगत स्वास्थ्य चुनौती से जूझ रहा था और इलाज करवा रहा था।

बिट्स (BITS) गोवा प्रशासन ने बयान में कहा कि इन मौतों के पीछे कई वजहें हैं, जैसे पढ़ाई का तनाव, पारिवारिक दबाव, रिश्तों की परेशानी, मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं और आत्म-उम्मीदें। कॉलेज ने छात्रों के लिए काउंसलिंग, चौबीस घंटे सातों दिन हेल्पलाइन और साप्ताहिक मानसिक स्वास्थ्य सलाह जैसी सेवाओं को मजबूत किया है। छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अब कॉलेज के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

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उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर जिले के नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एनआईईटी) में एमसीए के तृतीय वर्ष के एक छात्र ने अपने छात्रावास के कमरे में कथित रूप से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी। थाना नॉलेज पार्क के प्रभारी निरीक्षक सर्वेश कुमार सिंह ने बताया कि मूल रूप से झारखंड के रहने वाले कृष्णकांत (25) एनआईईटी कॉलेज से एमसीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे और वह ‘क्राउन हॉस्टल’ में ऋतिक नाम युवक के साथ रहते थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक