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बिहार तेजाब कांड: बाहुबली शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले सिवान जज का पटना ट्रांसफर

बिहार में खूखार घटनाओं को अंजाम देने वाला सीवान का बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन 10 सितंबर को जेल से बाहर आ गया था।

Author पटना | September 20, 2016 8:52 PM
बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन। (File Photo)

सिवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले सिवान कोर्ट के जज का पटना तबादला कर दिया गया है। हालांकि, पटना हाईकोर्ट के सूत्रों ने इसे ‘सामान्य तबादला’ बताया है। इस तबादले को 10 सितंबर को जमानत पर जेल से बाहर आए शहाबुद्दीन के साथ जोड़ा जा रहा था, बताया जा रहा था कि इससे जज को ‘खतरा हो सकता है।’ हाईकोर्ट के नोटिफिकेशन के मुताबिक सिवान स्पेशल कोर्ट के चीफ डिस्ट्रिक्ट अजय कुमार का तबादला अलग-अलग जिलों में पदस्थापित करीब आधा दर्जन जजों के साथ 9 सितंबर को तबादला किया गया था। यह तबादला शहाबुद्दीन को हाईकोर्ट द्वारा राजीव रोशन मर्डर केस में जमानत दिए जाने के दो दिन बाद किया गया। इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर शहाबुद्दीन का नाम था। जज श्रीवास्तव ने तेजाब कांड में दिसंबर 2015 में फैसला सुनाया था। गिरिश और सतीश राजीव के भाई थे, जिनकी हत्या साल 2004 में कर दी गई थी।

पटना हाईकोर्ट के सूत्रों ने बताया कि जिस डिस्ट्रिक्ट जज का कार्यकाल तीन साल का होता है, उनका शुरुआत के दो साल पूरे किए जाने के बाद कभी भी तबादला किया जा सकता है। हाई कोर्ट के सूत्रो ने बताया, ‘यह संयोग मात्र था कि सिवान जज का तबादला और शहाबुद्दीन को बेल एक साथ मिली। हालांकि, जज श्रीवास्तव टिप्पणी नहीं मिल पाई। सिवान जज के अलावा जिन जजों का तबादला किया गया है, उनमें फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट धीरज कुमार मिश्रा, अखिलेश पांडे और अरविंद कुमार पांडे भी शामिल हैं।

बता दें, बिहार में खूखार घटनाओं को अंजाम देने वाला सीवान का बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन 10 सितंबर को जेल से बाहर आ गया था। शहाबुद्दीन पर अवैध हथियार रखने, जेल में अवैध रूप से मोबाइल का उपयोग करने, मर्डर, किडनैपिंग और पुलिस के साथ गोलीबारी करने जैसे आरोप हैं। शहाबुद्दीन को पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद जमानत मिल गई थी। शहाबुद्दीन के क्राइम की कहानी 15 मार्च 2001 को लालू की पार्टी के एक नेता को गिरफ्तार करने आए पुलिस ऑफिसर संजीव कुमार को थप्पड़ मारने से शुरू हुई थी। इसके घटना के बाद शहाबुद्दीन के समर्थकों और पुलिस के बीच काफी लंबी झड़प हुई। थप्पड़ मारने वाले शहाबुद्दीन पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान शहाबुद्दीन समर्थकों और पुलिस के बीच गई घंटों तक गोलीबारी हुई। इस घटना में 10 लोग मारे गए और पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। तभी से शहाबुद्दीन एक बाहुबली के रूप में पहचाना जाने लगा।

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गौरतलब है कि दो भाइयों की तेजाब से नहलाकर हत्या करने और बाद में हत्याकांड के इकलौते गवाह उनके तीसरे भाई की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन भागलपुर जेल में बंद था। दोहरे हत्याकांड में लिप्त आरोपी हाईकोर्ट से फरवरी में ही जमानत पा चुका था और अब गवाह की हत्या के मामले में भी बुधवार को शीर्ष अदालत ने उसकी जमानत मंजूर कर ली। ऐसे में शहाबुद्दीन की जमानत के बाद बिहार की राजनीति गर्म हो गई है, नीतीश की सत्तारूढ़ पार्टी फिलहाल इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रही है। विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया है कि लालू यादव से नजदीकी के चलते सरकार ने उसका केस कमजोर कर दिया, जिसके चलते ऐसे गुंडे को जमानत मिल गई।

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