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मोदी सरकार पर फिर बरसे अटल सरकार में रहे FM यशवंत सिन्हा, कहा- देश के इतिहास में यूं ED का नहीं हुआ ‘दुरुपयोग’

सिन्हा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘लोगों के विभिन्न समूहों से बात करने के बाद, मैं अपनी यात्रा के अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि स्थिति सामान्य बिल्कुल नहीं है।’’

Author श्रीनगर | Updated: November 25, 2019 8:35 PM
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने महाराष्ट्र में सत्ता संग्राम पर चुप्पी तोड़ी है। सोमवार को उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA सरकार पर आरोप लगाया कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) सरीखी केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर राजनेताओं पर दबाव बना रही है। बकौल सिन्हा, “मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि एक बार फिर से ED जीती है, क्योंकि इस सब के पीछे भारत सरकार की एजेंसियां हैं, जो राजनेताओं के खिलाफ केस के जरिए उन पर दबाव बना रही हैं।” उन्होंने आगे यह भी दावा किया कि इस देश के इतिहास में इस तरह ईडी का किसी और ने गलत इस्तेमाल नहीं किया।

बता दें कि सिन्हा के नेतृत्व में नागरिक समाज के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को संपन्न हुई। कश्मीर की अपनी चार दिवसीय यात्रा को बेहद सफल करार दिया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद घाटी में स्थिति सामान्य नहीं है। सिन्हा ने पीटीआई-भाषा को यह भी बताया, ‘‘लोगों के विभिन्न समूहों से बात करने के बाद, मैं अपनी यात्रा के अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि स्थिति सामान्य बिल्कुल नहीं है।’’ सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले के चलते ‘‘भारी मनोवैज्ञानिक समस्या’’ पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा कि घाटी में भय का माहौल व्याप्त है। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के निवासियों ने केंद्र सरकार द्वारा इतने कठोर कदम उठाए जाने की उम्मीद नहीं की थी जिसके परिणामस्वरूप लोगों पर पाबंदी लगा दी गई है और अब यह संज्ञा शून्यता अत्यधिक डर में तब्दील हो गया है। सांसद फारूक अब्दुल्ला समेत मुख्यधारा के कई राजनेताओं को हिरासत में रखे जाने को लेकर पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसा कर घाटी में महत्त्वपूर्ण आवाज को बंद करने का काम किया है, जिससे एक खालीपन पैदा हो गया है, जिसके चलते लोगों की शिकायतें सुनने, उन्हें सामने रखने वाला कोई नहीं है।

उन्होंने लोगों द्वारा चुने गए एक राजनीतिक प्रतिनिधि अब्दुल्ला की हिरासत को बहुत ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ और ‘‘दर्दनाक’’ करार दिया। सिन्हा ने कहा, ‘‘उन्होंने एक महत्वपूर्ण आवाज को बंद कर दिया है और उन्होंने एक खालीपन पैदा कर दिया है। इस पर बात करने वाला कोई नहीं है।’’ जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के निरस्तीकरण के बाद घाटी की अपनी पहली यात्रा पर शुक्रवार को यहां पहुंचे समूह ने सोमवार दोपहर दिल्ली रवाना होने से पहले अपनी यात्रा के दौरान कई प्रतिनिधिमंडलों और व्यक्तियों से मुलाकात की।

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