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सीताराम येचुरी का आरोप- तृणमूल ने पंचायत चुनाव में बनाया आतंक का माहौल

सीताराम येचुरी ने संवाददाताओं से कहा, "पहले उन्होंने लोगों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया। फिर, नामांकन के बाद तृणमूल कांग्रेस ने नामांकन वापसी के लिए उम्मीदवारों को धमकाया।"

Author नई दिल्ली | May 14, 2018 8:02 PM
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी। (File Photo)

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को पंचायत चुनाव के दौरान आतंक का माहौल पैदा कर दिया। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की यह टिप्पणी खारिज कर दी कि वाम के शासन के दौरान भी हिंसा की घटना हुई थी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो ममता बनर्जी राज्य में कभी सत्ता में नहीं आती। वह तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन की टिप्पणी के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य में पंचायत चुनाव में हिंसा का इतिहास रहा है और वाम शासन की तुलना में कम हिंसा हुई है।

माकपा के महासचिव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इससे खुद पता चलता है कि वे रक्षात्मक हैं, कसूरवार हैं। जो हो रहा है मीडिया उसे दिखा रहा है। अगर यह वाम मोर्चा के शासन के दौरान होता तो तृणमूल कांग्रेस सरकार कभी बंगाल में नहीं आती और ममता बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं बनतीं।’’ हिंसा की आलोचना करते हुए येचुरी ने कहा कि यह सरासर लोकतंत्र पर हमला है और पार्टी लोगों की भागीदारी के जरिए इसका मुकाबला करेगी और इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

येचुरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पहले उन्होंने लोगों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया। फिर, नामांकन के बाद तृणमूल कांग्रेस ने नामांकन वापसी के लिए उम्मीदवारों को धमकाया। जिन लोगों ने अपना नाम वापस नहीं लिया उनपर हमला हुआ। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर कुठाराघात है। हम राष्ट्रपति शासन का समर्थन नहीं करते। माकपा लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। लोकतांत्रिक प्रतिरोध शुरू हो चुका है और यही हमारा जवाब होगा।’’

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में सोमवार को पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर हिंसा और मौतें होने का आरोप लगाते हुए एक वकील ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को वीडियो दिखाया तथा उनसे शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) और राज्य के गृह सचिव को तलब करने का अनुरोध किया। लेकिन मुख्य न्यायाधीश जे भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अरजीत बनर्जी की खंडपीठ ने एसईसी और गृह सचिव को सम्मन जारी करने से इनकार कर दिया। वकील ने कथित हिंसा की वीडियो क्लीपिंग देखने के लिए पीठ को अपना मोबाइल सौंपा था।

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