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अतीत से कुछ हटकर होगा इस बार उज्जैन का सिंहस्थ कुंभ

किन्नरों को सिंहस्थ के इतिहास में पहली बार पेशवाई निकालने का हक मिला है।

Author भोपाल | April 22, 2016 11:56 PM
सिंहस्थ मेला के दौरान उज्जैन में क्षिप्रा नदी से स्नान करके निकलता साधु।

धार्मिक नगरी उज्जैन में क्षिप्रा के पावन जल में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के स्नान के साथ शुक्रवार को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम सिंहस्थ का आगाज हो गया जो पूरे महीने भर चलेगा। पिछले तीन साल से राज्य सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों के बाद देश-दुनिया से जुटे करीब 40 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस बार सिंहस्थ में कुछ नई पहलकदमियां देखने को मिली हैं।

मान्यता है कि बैसाख के महीने में शुक्ल पक्ष हो और बृहस्पति सिंह राशि पर, सूर्य मेष राशि पर और चंद्रमा तुला राशि पर हो, साथ ही स्वाति नक्षत्र पूर्णिमा तिथि व्यतीपात योग और सोमवार का दिन हो तो क्षिप्रा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। बारह वर्ष बाद शुक्रवार को ग्रह नक्षत्रों का वह कल्याणकारी योग बना और इसके साथ ही सिंहस्थ का आगाज हुआ। इस दिन सिंह राशि में बृहस्पति के स्थित होने के कारण उज्जैन के कुंभ को सिंहस्थ कहा गया है।

इस बार का सिंहस्थ कुछ अलग होगा। दर्शनशास्त्र के विद्यार्थी रहे सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर सिंहस्थ में धर्म और मानवता के कल्याण के लिए संतों के प्रवचन और मार्गदर्शन के अलावा देशकाल और परिस्थितियों को लेकर एक वैचारिक कुंभ का आयोजन भी होगा।

यह 12, 13 और 14 मई को तीन दिन चलेगा। वैचारिक कुंभ में खेती से जुड़े विषयों जैसे जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कृषि कुंभ, महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषय जैसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ आंदोलन् को लेकर शक्ति कुंभ, स्वच्छता और नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने पर चिंतन के लिए पर्यावरण कुंभ और मानव कल्याण व धार्मिकता जैसे विषयों पर मंथन होगा।

वैचारिक कुंभ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, श्रीलंका के राष्ट्रपति, नेपाल के प्रधानमंत्री और कुंभ में आए सभी विद्वान साधु-संत मार्गदर्शन करेंगे। आयोजन में कई देशों के राजदूत भी शामिल होंगे और यहां से निकले निष्कर्षों को अपनी-अपनी जमीन तक ले जाएंगे।

इसी श्रंखला में विभिन्न अखाड़ों के प्रमुखों ने भी महाकुंभ के जरिए मानवीय जीवन मूल्यों का संदेश देने का मन बनाया है। निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि की पहल अनुपम है। वे उन मातृशक्तियों को स्वर्ण आभूषण अर्पित करेंगे, स्वर्ण जिनके बूते की बात नहीं है। जूनापीठाधीश्वर आचार्य अवधेशानंद गिरि ने प्रकृति के संरक्षण की दीक्षा देने का मन बनाया है। वे डेढ़ लाख पौधे रोपेंगे।

महानिर्वाण अखाड़े की पेशवाई में निकले भगवान शनि के उपासक दाति महाराज ने बेटियां बचाने का शंखनाद किया है। वे बेटियां बचाने को प्रेरित करेंगे। इसके अतिरिक्त पद्मविभूषण पंडित जसराज, हरिप्रसाद चौरसिया, हेमा मालिनी, विश्व मोहन भट्ट, सोनल मानसिंह, अनूप जलौटा सहित देश के प्रतिष्ठित कलाकार महाकुंभ को कला का भी उत्सव बनाएंगे।

किन्नरों को सिंहस्थ के इतिहास में पहली बार पेशवाई निकालने का हक मिला है। हालांकि गुरुवार को किन्नर अखाड़े की पेशवाई सादगी से निकली लेकिन किन्नर संतों के दर्शन के लिए ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि खुद किन्नर संत और प्रशासन हतप्रभ रह गया । किन्नरों ने अपनी पेशवाई को देवत्व यात्रा का नाम दिया है। इसमें देशप्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी था। बेशक किन्नर अखाड़े को अभी तक सरकार और अखाड़े परिसर से मान्यता नहीं मिली है।

इस बार कुंभ में जो भी आएगा सामान्य श्रद्धालु की हैसियत से ही आएगा। विदेश में बसे भारतीयों को मुख्यमंत्री की ओर से सिंहस्थ का आमंत्रण नई पहल है। राज्य पर्यटन निगम ने इसके लिए 100 से अधिक देशों में डाटा बेस उपलब्ध कराया है।

सिंहस्थ इस बार पूरी तरह हरित सिंहस्थ होगा। क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 90 करोड़ की खान नदी डायवर्जन योजना से क्षिप्रा के पानी को आचमन लायक बनाया गया है। 2004 के 262 करोड़ रुपए के बजट की तुलना में इस सिंहस्थ के लिए 3183 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान हुआ है।

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